अथावलम्ब्य क्षणमेकपादिकां
तदा निदद्रावुपपल्वलं खगः ।
स तिर्यगावर्जितकंधरः शिरः
पिधाय पक्षेण रतिक्लमालसः ॥
अथावलम्ब्य क्षणमेकपादिकां
तदा निदद्रावुपपल्वलं खगः ।
स तिर्यगावर्जितकंधरः शिरः
पिधाय पक्षेण रतिक्लमालसः ॥
तदा निदद्रावुपपल्वलं खगः ।
स तिर्यगावर्जितकंधरः शिरः
पिधाय पक्षेण रतिक्लमालसः ॥
अन्वयः
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अथ रतिक्लमालसः सः खगः तिर्यक् आवर्जितकंधरः (सन्) पक्षेण शिरः पिधाय क्षणम् एकपादिकां अवलम्ब्य उपपल्वलं तदा निदद्रौ ।
Summary
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Then, that bird, weary from love-play, stood for a moment on one leg near the pond. With its neck turned sideways and its head covered by a wing, it fell asleep.
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| अवलम्ब्य | अवलम्ब्य (अव√लम्ब्+ल्यप्) | having rested on |
| क्षणम् | क्षण (२.१) | for a moment |
| एकपादिकां | एकपादिका (२.१) | one-legged posture |
| तदा | तदा | then |
| निदद्रौ | निदद्रौ (नि√द्रै कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | slept |
| उपपल्वलं | उपपल्वलम् | near the pond |
| खगः | खग (१.१) | the bird |
| सः | तद् (१.१) | he |
| तिर्यक् | तिर्यक् | sideways |
| आवर्जितकंधरः | आवर्जित–कंधर (१.१) | with neck turned |
| शिरः | शिरस् (२.१) | head |
| पिधाय | पिधाय (पि√धा+ल्यप्) | having covered |
| पक्षेण | पक्ष (३.१) | with a wing |
| रतिक्लमालसः | रति–क्लम–अलस (१.१) | weary from the fatigue of love-making |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | व | ल | म्ब्य | क्ष | ण | मे | क | पा | दि | कां |
| त | दा | नि | द | द्रा | वु | प | प | ल्व | लं | ख | गः |
| स | ति | र्य | गा | व | र्जि | त | कं | ध | रः | शि | रः |
| पि | धा | य | प | क्षे | ण | र | ति | क्ल | मा | ल | सः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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