सनालमात्मानननिर्जितप्रभं
ह्रिया नतं काञ्चनमम्बुजन्म किम् ।
अबुद्ध तं विद्रुमदण्डमण्डितं
स पीतमम्भःप्रभुचामरं नु किम् ॥
सनालमात्मानननिर्जितप्रभं
ह्रिया नतं काञ्चनमम्बुजन्म किम् ।
अबुद्ध तं विद्रुमदण्डमण्डितं
स पीतमम्भःप्रभुचामरं नु किम् ॥
ह्रिया नतं काञ्चनमम्बुजन्म किम् ।
अबुद्ध तं विद्रुमदण्डमण्डितं
स पीतमम्भःप्रभुचामरं नु किम् ॥
अन्वयः
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सः तं (खगं) किम् आत्म-आनన-निर्जित-प्रभं ह्रिया नतं सनालं काञ्चनम् अम्बुजन्म (इति), नु किम् विद्रुम-दण्ड-मण्डितं पीतम् अम्भः-प्रभु-चामरं (इति) अबुद्ध ।
Summary
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Nala perceived the bird and wondered: "Is it a golden lotus, with its stalk, whose lustre is surpassed by my own face, now bent down in shame? Or is it the yellow chowrie-fan of Varuna, the lord of waters, adorned with a coral handle?"
पदच्छेदः
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| सनालम् | सनाल (२.१) | with its stalk |
| आत्म-आनన-निर्जित-प्रभं | आत्मन्–आनन–निर्जित–प्रभ (२.१) | whose lustre is surpassed by his own face |
| ह्रिया | ह्री (३.१) | with shame |
| नतं | नत (√नम्+क्त, २.१) | bent |
| काञ्चनम् | काञ्चन (२.१) | golden |
| अम्बुजन्म | अम्बुजन्मन् (२.१) | lotus |
| किम् | किम् | Is it? |
| अबुद्ध | अबुद्ध (√बुध् कर्तरि लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he thought/perceived |
| तं | तद् (२.१) | it |
| विद्रुम-दण्ड-मण्डितं | विद्रुम–दण्ड–मण्डित (२.१) | adorned with a coral handle |
| सः | तद् (१.१) | he (Nala) |
| पीतम् | पीत (२.१) | yellow |
| अम्भः-प्रभु-चामरं | अम्भस्–प्रभु–चामर (२.१) | the chowrie-fan of the lord of waters (Varuna) |
| नु | नु | Or |
| किम् | किम् | is it? |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | ना | ल | मा | त्मा | न | न | नि | र्जि | त | प्र | भं |
| ह्रि | या | न | तं | का | ञ्च | न | म | म्बु | ज | न्म | किम् |
| अ | बु | द्ध | तं | वि | द्रु | म | द | ण्ड | म | ण्डि | तं |
| स | पी | त | म | म्भः | प्र | भु | चा | म | रं | नु | किम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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