सितांशुवर्णैर्वयति स्म तद्गुणैः
महासिवेम्नः सहकृत्वरी बहुम् ।
दिगङ्गनाङ्गावरणं रणाङ्गणे
यशः पटं तद्भटचातुरीतुरी ॥
सितांशुवर्णैर्वयति स्म तद्गुणैः
महासिवेम्नः सहकृत्वरी बहुम् ।
दिगङ्गनाङ्गावरणं रणाङ्गणे
यशः पटं तद्भटचातुरीतुरी ॥
महासिवेम्नः सहकृत्वरी बहुम् ।
दिगङ्गनाङ्गावरणं रणाङ्गणे
यशः पटं तद्भटचातुरीतुरी ॥
अन्वयः
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तद्भटचातुरी-तुरी महासिवेम्नः सहकृत्वरी (सती) तद्गुणैः सितांशुवर्णैः (रज्जुभिः) रणाङ्गणे दिगङ्गना-अङ्ग-आवरणम् बहुम् यशः पटम् वयति स्म।
Summary
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In the battlefield, the skill of his soldiers, acting as a loom and assisted by his great sword as a shuttle, wove a vast cloth of fame. This cloth, woven with his moon-white virtues as threads, served as a garment to cover the bodies of the maidens of the directions.
पदच्छेदः
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| सितांशुवर्णैः | सितांशु–वर्ण (३.३) | with moon-white color |
| वयति स्म | वयति स्म (√वे कर्तरि लट् (स्मयोगे भूतकालः) (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | wove |
| तद्गुणैः | तद्–गुण (३.३) | by his virtues |
| महासिवेम्नः | महत्–असि–वेमन् (६.१) | of the great sword as a shuttle |
| सहकृत्वरी | सहकृत्वरी (१.१) | being an assistant |
| बहुम् | बहु (२.१) | vast |
| दिगङ्गनाङ्गावरणम् | दिक्–अङ्गना–अङ्ग–आवरण (२.१) | a covering for the bodies of the maidens of the directions |
| रणाङ्गणे | रण–अङ्गण (७.१) | in the battlefield |
| यशः | यशस् (२.१) | fame |
| पटम् | पट (२.१) | cloth |
| तद्भटचातुरीतुरी | तद्–भट–चातुरी–तुरी (१.१) | the skill of his soldiers as the loom |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सि | तां | शु | व | र्णै | र्व | य | ति | स्म | त | द्गु | णैः |
| म | हा | सि | वे | म्नः | स | ह | कृ | त्व | री | ब | हुम् |
| दि | ग | ङ्ग | ना | ङ्गा | व | र | णं | र | णा | ङ्ग | णे |
| य | शः | प | टं | त | द्भ | ट | चा | तु | री | तु | री |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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