यदम्बुपूरप्रतिबिम्बितायति-
र्मरुत्तरङ्गैस्तरलस्तटद्रुमः ।
निमज्ज्य मैनाकमहीभृतः सत-
स्ततान पक्षान्धुवतः सपक्षताम् ॥
यदम्बुपूरप्रतिबिम्बितायति-
र्मरुत्तरङ्गैस्तरलस्तटद्रुमः ।
निमज्ज्य मैनाकमहीभृतः सत-
स्ततान पक्षान्धुवतः सपक्षताम् ॥
र्मरुत्तरङ्गैस्तरलस्तटद्रुमः ।
निमज्ज्य मैनाकमहीभृतः सत-
स्ततान पक्षान्धुवतः सपक्षताम् ॥
अन्वयः
AI
मरुत्तरङ्गैः तरलः, यदम्बुपूरप्रतिबिम्बितायतिः तटद्रुमः, निमज्ज्य पक्षान् धुवतः सतः मैनाकमहीभृतः सपक्षताम् ततान।
Summary
AI
The tree on the bank, trembling in the waves of wind, its full length reflected in the lake's water, resembled the Mainaka mountain. It appeared to be an ally (sapaksha) to Mainaka, showing its own 'wings' (sapaksha) by shaking its 'wings' (branches) while being 'submerged' (reflected) in the water.
पदच्छेदः
AI
| यदम्बुपूरप्रतिबिम्बितायतिः | यद्–अम्बु–पूर–प्रतिबिम्बित–आयति (१.१) | whose length is reflected in its water |
| मरुत्तरङ्गैः | मरुत्–तरङ्ग (३.३) | by the waves of wind |
| तरलः | तरल (१.१) | trembling |
| तटद्रुमः | तट–द्रुम (१.१) | the tree on the bank |
| निमज्ज्य | निमज्ज्य (नि√मस्ज्+ल्यप्) | having submerged |
| मैनाकमहीभृतः | मैनाक–महीभृत् (६.१) | of the Mainaka mountain |
| सतः | सत् (√अस्+शतृ, ६.१) | of the one being |
| ततान | ततान (√तन् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | showed |
| पक्षान् | पक्ष (२.३) | wings |
| धुवतः | धुवत् (√धू+शतृ, ६.१) | of the one shaking |
| सपक्षताम् | सपक्षता (२.१) | the state of having wings / being an ally |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | द | म्बु | पू | र | प्र | ति | बि | म्बि | ता | य | ति |
| र्म | रु | त्त | र | ङ्गै | स्त | र | ल | स्त | ट | द्रु | मः |
| नि | म | ज्ज्य | मै | ना | क | म | ही | भृ | तः | स | त |
| स्त | ता | न | प | क्षा | न्धु | व | तः | स | प | क्ष | ताम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.