चलीकृता यत्र तरङ्गरिङ्गणै-
रबालशैवाललतापरम्पराः ।
ध्रुवं दधुर्वाडवहव्यवाडव-
स्थितिप्ररोहत्तमभूमधूमताम् ॥
चलीकृता यत्र तरङ्गरिङ्गणै-
रबालशैवाललतापरम्पराः ।
ध्रुवं दधुर्वाडवहव्यवाडव-
स्थितिप्ररोहत्तमभूमधूमताम् ॥
रबालशैवाललतापरम्पराः ।
ध्रुवं दधुर्वाडवहव्यवाडव-
स्थितिप्ररोहत्तमभूमधूमताम् ॥
अन्वयः
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यत्र तरङ्गरिङ्गणैः चलीकृताः अबालशैवाललतापरम्पराः, वाडवहव्यवाड् अवस्थितिप्ररोहत्तमभूमधूमताम् ध्रुवम् दधुः।
Summary
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In that lake, the rows of thick moss-creepers, set in motion by the crawling waves, certainly assumed the appearance of smoke rising from the abundant darkness caused by the presence of the submarine fire hidden within.
पदच्छेदः
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| चलीकृताः | चलीकृत (१.३) | made to move |
| यत्र | यत्र | where |
| तरङ्गरिङ्गणैः | तरङ्ग–रिङ्गण (३.३) | by the movement of the waves |
| अबालशैवाललतापरम्पराः | अबाल–शैवाल–लता–परम्परा (१.३) | the series of thick moss-creepers |
| ध्रुवम् | ध्रुवम् | certainly |
| दधुः | दधुः (√धा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | assumed |
| वाडवहव्यवाड् | वाडव–हव्यवाट् (१.१) | the submarine fire |
| अवस्थिति | अवस्थिति (२.१) | presence |
| प्ररोहत्तमभूमधूमताम् | प्ररोहत्–तमस्–भूमन्–धूमता (२.१) | the state of being the smoke from the abundant rising darkness |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| च | ली | कृ | ता | य | त्र | त | र | ङ्ग | रि | ङ्ग | णै |
| र | बा | ल | शै | वा | ल | ल | ता | प | र | म्प | राः |
| ध्रु | वं | द | धु | र्वा | ड | व | ह | व्य | वा | ड | व |
| स्थि | ति | प्र | रो | ह | त्त | म | भू | म | धू | म | ताम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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