गत्वा सद्यः कलभतनुतां शीघ्रसंपातहेतोः
क्रीडाशैले प्रथमकथिते रम्यसानौ निषण्णः ।
अर्हस्यन्तर्भवनपतितां कर्तुमल्पाल्पभासं
खद्योतालीविलसितनिभां विद्युदुन्मेषदृष्टिम् ॥
गत्वा सद्यः कलभतनुतां शीघ्रसंपातहेतोः
क्रीडाशैले प्रथमकथिते रम्यसानौ निषण्णः ।
अर्हस्यन्तर्भवनपतितां कर्तुमल्पाल्पभासं
खद्योतालीविलसितनिभां विद्युदुन्मेषदृष्टिम् ॥
क्रीडाशैले प्रथमकथिते रम्यसानौ निषण्णः ।
अर्हस्यन्तर्भवनपतितां कर्तुमल्पाल्पभासं
खद्योतालीविलसितनिभां विद्युदुन्मेषदृष्टिम् ॥
अन्वयः
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शीघ्र-संपात-हेतोः सद्यः कलभ-तनुतां गत्वा, प्रथम-कथिते रम्य-सानौ क्रीडा-शैले निषण्णः (त्वं) खद्योत-आली-विलसित-निभां अल्पाल्प-भासं विद्युत्-उन्मेष-दृष्टिं अन्तर्-भवन-पतितां कर्तुं अर्हसि।
Summary
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For a swift entry, assume the size of a young elephant and rest on the beautiful peaks of the previously mentioned pleasure-hill. Then, cast your gaze into the house with a dim flash of lightning, resembling the flickering of a swarm of fireflies.
सारांश
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तुम नन्हा रूप धरकर क्रीड़ा-पर्वत पर बैठना और जुगनू की चमक जैसी अपनी मंद बिजली की दृष्टि घर के भीतर डालना।
वल्लभदेवः
ततस्त्वं पूर्वोक्ते रम्यसानौ क्रीडाद्राववस्थितः सन्नस्मद्वेश्माभ्यन्तरपतितां विद्युदुन्मेषदृष्टिं तडिदुद्योतनमेव दृशं कर्तुमर्हसि । यथा तां पश्यसीति भावः । किं कृत्या । तत्क्षणं कलभतनुतामिभशिशुपेलवत्वं क्षिप्रगमनार्थ प्राप्य । महति हि देहे व्यथा जायते । कीदृशीं दृष्टिम् । अल्पाल्पा कृशप्राया भाः कान्तिर्यस्यास्ताम् । अत एव च खद्योताल्या ज्योतिर्मालिश्रेण्या यद्विलसितं स्फुरणं तत्सदृशीम् ॥
पदच्छेदः
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| गत्वा | गत्वा (√गम्+क्त्वा) | Having gone |
| सद्यः | सद्यस् | at once |
| कलभतनुताम् | कलभ–तनुता (२.१) | to the state of a young elephant's body |
| शीघ्रसंपातहेतोः | शीघ्र–संपात–हेतु (५.१) | for the sake of a swift descent |
| क्रीडाशैले | क्रीडा–शैल (७.१) | on the pleasure-hill |
| प्रथमकथिते | प्रथम–कथित (√कथित+क्त, ७.१) | previously mentioned |
| रम्यसानौ | रम्य–सानु (७.१) | on the beautiful peak |
| निषण्णः | निषण्णः (नि√सद्+क्त, १.१) | seated |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you should |
| अन्तर्भवनपतिताम् | अन्तर्–भवन–पतित (√पतित+क्त, २.१) | fallen inside the house |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to make/cast |
| अल्पाल्पभासम् | अल्प-अल्प–भास् (२.१) | having a very faint light |
| खद्योतालीविलसितनिभां | खद्योत-आली–विलसित–निभ (२.१) | resembling the glimmer of a line of fireflies |
| विद्युदुन्मेषदृष्टिम् | विद्युत्-उन्मेष–दृष्टि (२.१) | a glance which is a flash of lightning |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | त्वा | स | द्यः | क | ल | भ | त | नु | तां | शी | घ्र | सं | पा | त | हे | तोः |
| क्री | डा | शै | ले | प्र | थ | म | क | थि | ते | र | म्य | सा | नौ | नि | ष | ण्णः |
| अ | र्ह | स्य | न्त | र्भ | व | न | प | ति | तां | क | र्तु | म | ल्पा | ल्प | भा | सं |
| ख | द्यो | ता | ली | वि | ल | सि | त | नि | भां | वि | द्यु | दु | न्मे | ष | दृ | ष्टिम् |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
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