उत्पश्यामि त्वयि तटगते स्निग्धभिन्नाञ्जनाभे
सद्यःकृत्तद्विरददशनच्छेदगौरस्य तस्य ।
लीलामद्रेः स्तिमितनयनप्रेक्षणीयां भवित्री-
मंसन्यस्ते सति हलभृतो मेचके वाससीव ॥
उत्पश्यामि त्वयि तटगते स्निग्धभिन्नाञ्जनाभे
सद्यःकृत्तद्विरददशनच्छेदगौरस्य तस्य ।
लीलामद्रेः स्तिमितनयनप्रेक्षणीयां भवित्री-
मंसन्यस्ते सति हलभृतो मेचके वाससीव ॥
सद्यःकृत्तद्विरददशनच्छेदगौरस्य तस्य ।
लीलामद्रेः स्तिमितनयनप्रेक्षणीयां भवित्री-
मंसन्यस्ते सति हलभृतो मेचके वाससीव ॥
अन्वयः
AI
स्निग्ध-भिन्न-अञ्जन-आभे त्वयि तट-गते सति, सद्यः-कृत्त-द्विरद-दशन-च्छेद-गौरस्य तस्य अद्रेः लीला अंस-न्यस्ते मेचके वाससी हल-भृतः इव स्तिमित-नयन-प्रेक्षणीया भवित्री।
Summary
AI
When you, possessing the luster of glossy powdered collyrium, reach the slope of that mountain which is as white as a freshly cut ivory tusk, the resulting beauty will be worth watching. It will resemble Lord Balarāma with a dark garment draped over his shoulder.
सारांश
AI
श्वेत कैलाश पर्वत पर जब तुम काजल के समान श्याम होकर बैठोगे, तब उसकी शोभा वैसी ही होगी जैसे बलराम ने अपने गोरे कंधे पर नील वस्त्र धारण कर रखा हो।
वल्लभदेवः
त्वयि शिखरस्थिते सति तस्य कैलासस्यानिमिषलोचनदृश्यां भाविनीं शोभामुत्प्रेक्षेऽहम् । तस्य कस्येव । अंसन्यस्ते स्कन्धप्रावृते मेचके कृष्णे वस्त्रे हलधरस्येव । मेघस्य कालत्वात् । स्निग्धभिन्नाञ्जनाभेऽरूक्षपिष्टकज्जलनिभ इति मेघविशेषणम् । तस्य तु तत्क्षणच्छिन्नदन्तिदन्तखण्डवलक्षस्य । गौरोऽपि शुभ्रः ॥
पदच्छेदः
AI
| उत्पश्यामि | उत्पश्यामि (उत्√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I foresee |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | you |
| तटगते | तट–गत (७.१) | when on its slope |
| स्निग्धभिन्नाञ्जनाभे | स्निग्ध–भिन्न–अञ्जन–आभ (७.१) | O you who have the lustre of glossy powdered antimony |
| सद्यःकृत्तद्विरददशनच्छेदगौरस्य | सद्यस्–कृत्त–द्विरद–दशन–च्छेद–गौर (६.१) | of it (the mountain) which is white like a slice of freshly cut elephant tusk |
| तस्य | तद् (६.१) | of that |
| लीलाम् | लीला (२.१) | beauty |
| अद्रेः | अद्रि (६.१) | of the mountain |
| स्तिमितनयनप्रेक्षणीयाम् | स्तिमित–नयन–प्रेक्षणीय (२.१) | worthy of being gazed at with unwinking eyes |
| भवित्रीम् | भवित्री (√भू+तृच्, २.१) | which will be |
| अंसे | अंस (७.१) | on the shoulder |
| न्यस्ते | न्यस्त (नि√अस्+क्त, ७.१) | when placed |
| सति | सत् (√अस्+शतृ, ७.१) | being |
| हलभृतः | हलभृत् (६.१) | of the plough-bearer (Balarama) |
| मेचके | मेचक (७.१) | dark-blue |
| वाससि | वासस् (७.१) | garment |
| इव | इव | like |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | त्प | श्या | मि | त्व | यि | त | ट | ग | ते | स्नि | ग्ध | भि | न्ना | ञ्ज | ना | भे |
| स | द्यः | कृ | त्त | द्वि | र | द | द | श | न | च्छे | द | गौ | र | स्य | त | स्य |
| ली | ला | म | द्रेः | स्ति | मि | त | न | य | न | प्रे | क्ष | णी | यां | भ | वि | त्री |
| मं | स | न्य | स्ते | स | ति | ह | ल | भृ | तो | मे | च | के | वा | स | सी | व |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.