पाण्डुच्छायोपवनवृतयः केतकैः सूचिभिन्नै-
र्नीडारम्भैर्गृहबलिभुजामाकुलग्रामचैत्याः ।
त्वय्यासन्ने फलपरिणतिश्यामजम्बूवनान्ताः
संपत्स्यन्ते कतिपयदिनस्थायिहंसा दशार्णाः ॥
पाण्डुच्छायोपवनवृतयः केतकैः सूचिभिन्नै-
र्नीडारम्भैर्गृहबलिभुजामाकुलग्रामचैत्याः ।
त्वय्यासन्ने फलपरिणतिश्यामजम्बूवनान्ताः
संपत्स्यन्ते कतिपयदिनस्थायिहंसा दशार्णाः ॥
र्नीडारम्भैर्गृहबलिभुजामाकुलग्रामचैत्याः ।
त्वय्यासन्ने फलपरिणतिश्यामजम्बूवनान्ताः
संपत्स्यन्ते कतिपयदिनस्थायिहंसा दशार्णाः ॥
अन्वयः
AI
सूचि-भिन्नैः केतकैः पाण्डु-छाय-उपवन-वृतयः, गृह-बलि-भुजाम् नीड-आरम्भैः आकुल-ग्राम-चैत्याः, त्वयि आसन्ने फल-परिणति-श्याम-जम्बू-वन-अन्ताः, कतिपय-दिन-स्थायि-हंसाः दशार्णाः संपत्स्यन्ते।
Summary
AI
Upon your arrival, the Daśārṇa region will be transformed. Its garden fences will turn pale with blooming ketaka flowers, and village trees will be busy with crows building nests. The fringes of the jambū forests will turn dark with ripening fruit, and the region will host migratory swans for a few days, celebrating the onset of the rainy season.
सारांश
AI
तुम्हारे आने पर दशार्ण देश में बगीचों की बाड़ें केतकी के फूलों से सफेद हो जाएँगी, गाँवों के वृक्ष घोंसले बनाने वाले पक्षियों से भर जाएँगे, जामुन के वन पके फलों से काले दिखेंगे और हंस कुछ दिनों के लिए वहाँ रुकेंगे।
वल्लभदेवः
त्वयि निकटे सति दशार्णाख्या जनपदा एवंविधाः संपत्स्यन्ते भविष्यन्ति । कीदृशाः । केतकैः पुष्पैः पाण्डुच्छायाः शुक्लशोभा उपवनवृतय उद्यानकण्ठ्यो येषाम् । मितत्वात्केतकानाम् । सूच्या गर्भकण्टकेन भिन्नैर्विदारितैः । तेषां ह्यन्तःस्था सूचिर्भित्त्वा विनिर्याति । तथा गृहबलिभुजां काकानां नीडारम्भैरालयक्रमैराकुलानि व्याप्तानि ग्रामचैत्यानि येषु । वर्षभयाद्धि पक्षिणः प्रावृषि नान्यत्र निर्यान्ति । चैत्यं बुद्धालयः । यदि वा महाभोगप्रज्ञाततमो वनस्पतिश्चैत्यः । तथा फलानां परिणत्या पाकेन श्यामा जम्बूवनान्ता यत्र । कपित्थानीव हि जम्बूफलानि पाकेन श्यामायन्ते । कतिपयदिनस्थायिनश्च हंसा येषु । मेघालोके मानसगमनात् ॥
पदच्छेदः
AI
| पाण्डुच्छायोपवनवृतयः | पाण्डु–छाया–उपवन–वृति (१.३) | whose garden-hedges have a pale hue |
| केतकैः | केतक (३.३) | with Ketaki flowers |
| सूचिभिन्नैः | सूचि–भिन्न (३.३) | burst open by their tips |
| नीडारम्भैः | नीड–आरम्भ (३.३) | with the beginnings of nests |
| गृहबलिभुजाम् | गृह–बलि–भुज् (६.३) | of the house-crows |
| आकुलग्रामचैत्याः | आकुल–ग्राम–चैत्य (१.३) | whose village-shrines are bustling |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | when you |
| आसन्ने | आसन्न (आ√सद्+क्त, ७.१) | are near |
| फलपरिणतिश्यामजम्बूवनान्ताः | फल–परिणति–श्याम–जम्बू–वन–अन्त (१.३) | the borders of whose forests are dark with ripe Jambu fruits |
| सम्पत्स्यन्ते | सम्पत्स्यन्ते (सम्√पद् कर्तरि लृट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | will become |
| कतिपयदिनस्थायिहंसाः | कतिपय–दिन–स्थायि–हंस (१.३) | where swans will stay for a few days |
| दशार्णाः | दशार्ण (१.३) | the country of Dasharna |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पा | ण्डु | च्छा | यो | प | व | न | वृ | त | यः | के | त | कैः | सू | चि | भि | न्नै |
| र्नी | डा | र | म्भै | र्गृ | ह | ब | लि | भु | जा | मा | कु | ल | ग्रा | म | चै | त्याः |
| त्व | य्या | स | न्ने | फ | ल | प | रि | ण | ति | श्या | म | ज | म्बू | व | ना | न्ताः |
| सं | प | त्स्य | न्ते | क | ति | प | य | दि | न | स्था | यि | हं | सा | द | शा | र्णाः |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.