छन्नोपान्तः परिणतफलद्योतिभिः काननाम्रै-
स्त्वय्यारूढे शिखरमचलः स्निग्धवेणीसवर्णे ।
नूनं यास्यत्यमरमिथुनप्रेक्षणीयामवस्थां
मध्ये श्यामः स्तन इव भुवः शेषविस्तारपाण्डुः ॥
छन्नोपान्तः परिणतफलद्योतिभिः काननाम्रै-
स्त्वय्यारूढे शिखरमचलः स्निग्धवेणीसवर्णे ।
नूनं यास्यत्यमरमिथुनप्रेक्षणीयामवस्थां
मध्ये श्यामः स्तन इव भुवः शेषविस्तारपाण्डुः ॥
स्त्वय्यारूढे शिखरमचलः स्निग्धवेणीसवर्णे ।
नूनं यास्यत्यमरमिथुनप्रेक्षणीयामवस्थां
मध्ये श्यामः स्तन इव भुवः शेषविस्तारपाण्डुः ॥
अन्वयः
AI
परिणत-फल-द्योतिभिः कानन-आम्रैः छन्न-उपान्तः, स्निग्ध-वेणी-सवर्णे त्वयि शिखरम् आरूढे (सति), अचलः नूनं मध्ये श्यामः शेष-विस्तार-पाण्डुः भुवः स्तनः इव अमर-मिथुन-प्रेक्षणीयाम् अवस्थाम् यास्यति।
Summary
AI
With its slopes covered by mango trees bearing ripe fruit, the mountain, with the dark cloud resting on its peak, will resemble the breast of the Earth—dark in the center and pale everywhere else—a sight that celestial couples will find truly beautiful.
सारांश
AI
जब तुम काले केशों के समान अपनी आभा लेकर उस पर्वत के शिखर पर आरूढ़ होगे, जिसके किनारे पके हुए आमों के वनों से व्याप्त हैं, तब वह पर्वत पृथ्वी के स्तन के समान दिखाई देगा, जो बीच में श्याम और शेष भाग में पीला हो।
वल्लभदेवः
त्वयि शृङ्गमुद्गते सत्याम्रकूटोऽचलो निश्चितं सुरयुगलालोकनीयां रम्यां दशामापत्स्यते । यतः परिणतफलद्योतिभिः पक्वाम्रशोभिभिर्वनाम्रवृक्षेच्छन्नोपान्तच्छादितपर्यन्तः । स्वमपि स्निग्धवेणीसवर्णोऽरूक्षकेशकलापकालः । अतश्च कृष्णचूचुकः समस्तपीतः महीकुच इवेत्युपमा । अत एव देवद्वन्द्वदर्शनम् ॥
पदच्छेदः
AI
| छन्नोपान्तः | छन्न–उपान्त (१.१) | with slopes covered |
| परिणतफलद्योतिभिः | परिणत–फल–द्योतिन् (३.३) | by those shining with ripe fruit |
| काननाम्रैः | कानन–आम्र (३.३) | by wild mango trees |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | when you |
| आरूढे | आरूढ (आ√रुह्+क्त, ७.१) | have settled on |
| शिखरम् | शिखर (२.१) | the peak |
| अचलः | अचल (१.१) | the mountain |
| स्निग्धवेणीसवर्णे | स्निग्ध–वेणी–सवर्ण (७.१) | who are of the same color as a glossy braid |
| नूनं | नूनम् | surely |
| यास्यति | यास्यति (√या कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will attain |
| अमरमिथुनप्रेक्षणीयाम् | अमर–मिथुन–प्रेक्षणीय (२.१) | worth seeing by divine couples |
| अवस्थां | अवस्था (२.१) | a state |
| मध्ये | मध्य (७.१) | in the middle |
| श्यामः | श्याम (१.१) | dark |
| स्तनः | स्तन (१.१) | breast |
| इव | इव | like |
| भुवः | भू (६.१) | of the Earth |
| शेषविस्तारपाण्डुः | शेष–विस्तार–पाण्डु (१.१) | pale in the remaining expanse |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| छ | न्नो | पा | न्तः | प | रि | ण | त | फ | ल | द्यो | ति | भिः | का | न | ना | म्रै |
| स्त्व | य्या | रू | ढे | शि | ख | र | म | च | लः | स्नि | ग्ध | वे | णी | स | व | र्णे |
| नू | नं | या | स्य | त्य | म | र | मि | थु | न | प्रे | क्ष | णी | या | म | व | स्थां |
| म | ध्ये | श्या | मः | स्त | न | इ | व | भु | वः | शे | ष | वि | स्ता | र | पा | ण्डुः |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.