कच्चित्सोम्य व्यवसितमिदं बन्धुकृत्यं त्वया मे
प्रत्याख्यातुं न खलु भवतो धीरतां तर्कयामि ।
निःशब्दोऽपि प्रदिशसि जलं याचितश्चातकेभ्यः
प्रत्युक्तं हि प्रणयिषु सतामीप्सितार्थक्रियैव ॥
कच्चित्सोम्य व्यवसितमिदं बन्धुकृत्यं त्वया मे
प्रत्याख्यातुं न खलु भवतो धीरतां तर्कयामि ।
निःशब्दोऽपि प्रदिशसि जलं याचितश्चातकेभ्यः
प्रत्युक्तं हि प्रणयिषु सतामीप्सितार्थक्रियैव ॥
प्रत्याख्यातुं न खलु भवतो धीरतां तर्कयामि ।
निःशब्दोऽपि प्रदिशसि जलं याचितश्चातकेभ्यः
प्रत्युक्तं हि प्रणयिषु सतामीप्सितार्थक्रियैव ॥
अन्वयः
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सौम्य! कच्चित् त्वया मे इदम् बन्धु-कृत्यम् व्यवसितम्? भवतः प्रत्याख्यातुम् धीरताम् न खलु तर्कयामि; (यतः) चातकेभ्यः याचितः निःशब्दः अपि जलम् प्रदिशसि; सताम् प्रणयिषु ईप्सित-अर्थ-क्रिया एव हि प्रत्युक्तम् ।
Summary
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Addressing the cloud as "gentle one," he asks if it has resolved to perform this friendly act. He does not doubt its commitment, noting that it silently grants water to thirsty cātaka birds. For the virtuous, the only proper answer to a friend's request is the actual fulfillment of that desired goal.
सारांश
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हे सौम्य! मुझे विश्वास है कि तुम मेरा यह कार्य करने का निश्चय कर चुके हो। चातकों द्वारा माँगे जाने पर तुम मौन रहकर भी उन्हें जल देते हो; क्योंकि सज्जन लोग याचकों को उनका अभीष्ट कार्य पूर्ण करके ही उत्तर देते हैं।
वल्लभदेवः
हे सोम्य प्रियदर्शनैतन्मित्रकार्य कच्चिद्भवता व्यवसितमंगीकृतं मम । अवश्यमत्र त्वया व्यवसायवता भाव्यम् । प्रत्याख्यातुमत्र तव धैर्यं न लक्षयामि । तथा हि त्वमर्थितः सन्नब्रुवन्नपि चातकेभ्यस्तोयं वितरसि । यस्मान्महतामर्थिष्वभिमानार्थसंपादनमेव प्रतीपवचनम् । महान्तो हि कर्मणा ब्रुवन्ति न वचमा ॥
पदच्छेदः
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| कच्चित् | कच्चित् | I hope that |
| सोम्य | सोम्य (८.१) | O gentle one |
| व्यवसितम् | व्यवसित (वि+अव√सो+क्त, १.१) | undertaken |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| बन्धुकृत्यं | बन्धु–कृत्य (१.१) | a friend's duty |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| प्रत्याख्यातुम् | प्रत्याख्यातुम् (प्रति+आ√ख्या+तुमुन्) | to refuse |
| न | न | not |
| खलु | खलु | indeed |
| भवतः | भवत् (६.१) | your |
| धीरतां | धीरता (२.१) | nobility |
| तर्कयामि | तर्कयामि (√तर्क् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I infer |
| निःशब्दः | निःशब्द (१.१) | silent |
| अपि | अपि | even |
| प्रदिशसि | प्रदिशसि (प्र√दिश् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you give |
| जलम् | जल (२.१) | water |
| याचितः | याचित (√याच्+क्त, १.१) | having been asked |
| चातकेभ्यः | चातक (४.३) | to the Chataka birds |
| प्रत्युक्तं | प्रत्युक्त (प्रति√वच्+क्त, १.१) | answer |
| हि | हि | for |
| प्रणयिषु | प्रणयिन् (७.३) | towards supplicants |
| सताम् | सत् (६.३) | of the noble |
| ईप्सितार्थक्रियैव | ईप्सित–अर्थ–क्रिया–एव (१.१) | the very act of fulfilling the desired object |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | च्चि | त्सो | म्य | व्य | व | सि | त | मि | दं | ब | न्धु | कृ | त्यं | त्व | या | मे |
| प्र | त्या | ख्या | तुं | न | ख | लु | भ | व | तो | धी | र | तां | त | र्क | या | मि |
| निः | श | ब्दो | ऽपि | प्र | दि | श | सि | ज | लं | या | चि | त | श्चा | त | के | भ्यः |
| प्र | त्यु | क्तं | हि | प्र | ण | यि | षु | स | ता | मी | प्सि | ता | र्थ | क्रि | यै | व |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
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