अन्वयः
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पार्वती तत्-उपयोग-सम्भवाम्, सताम् मनोहराम् अपि, अप्रतर्क्य-विधियोग-निर्मिताम् विक्रियाम्, आम्रता सहकारताम् इव, ययौ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
पार्वतीति । पार्वती = कर्त्री । तदुपयोगसंभवां मद्यपानजन्यां विक्रियामपि सतां मनोहराम् आम्रताम्रत्वमप्रतर्क्यो दुर्ज्ञेयो यो विधियोगोऽनुष्ठानयोगस्तेन निर्मितां सहकारतामतिसौरभत्वमिव ययौ = प्रापेत्यर्थः । `आम्रश्चूतो रसालोसौ सहकारोऽतिसौरभः` इत्यमरः । आम्रमेवाऽनुष्ठानविशेषेण यथा सहकारो भवति तद्वद्विक्रियाऽपि मनोहराऽभूदिति भावः
Summary
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Parvati underwent a transformation from consuming the drink. This change, though charming even in noble people, was like a mango tree attaining its special fragrant 'Sahakara' state, a transformation created by an inconceivable act of fate.
सारांश
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मदिरा के प्रभाव से पार्वती वैसी ही और अधिक रसीली और मनमोहक हो गईं, जैसे साधारण आम पककर विशेष सुगंधित 'सहकार' बन जाता है।
पदच्छेदः
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| पार्वती | पार्वती (१.१) | Parvati |
| तदुपयोगसम्भवाम् | तत्–उपयोग–सम्भवा (२.१) | arising from its consumption |
| विक्रियाम् | विक्रिया (२.१) | a transformation |
| अपि | अपि | even |
| सताम् | सत् (६.३) | for the good |
| मनोहराम् | मनोहर (२.१) | charming |
| अप्रतर्क्यविधियोगनिर्मिताम् | अप्रतर्क्य–विधि–योग–निर्मित (निर्√मा+क्त, २.१) | created by an inconceivable turn of fate |
| आम्रता | आम्रता (१.१) | a mango tree's state |
| इव | इव | like |
| सहकारताम् | सहकारता (२.१) | the state of a fragrant mango tree |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attained |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पा | र्व | ती | त | दु | प | यो | ग | स | म्भ | वां |
| वि | क्रि | या | म | पि | स | तां | म | नो | ह | राम् |
| अ | प्र | त | र्क्य | वि | धि | यो | ग | नि | र्मि | ता |
| मा | म्र | ते | व | स | ह | का | र | तां | य | यौ |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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