अन्वयः
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चारुमुखि! एषः शशी तरलबिम्बया योगतारया, साध्वसात् उपगतप्रकम्पया नवदीक्षया कन्यया वरः इव, युज्यते।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
एष इति । हे चारुमुखि = हे उज्ज्वलानने ! `स्वाङ्गाच्चोपसर्जनादसंयोगोपधात्` (अष्टाध्यायी ४.१.५४ ) इति ङीष् । एष शशी, तरलबिम्बया = स्फुरन्मण्डलया योगतारया । प्रत्यहं यया युज्यते सा योगतारा । नित्यनक्षत्रेणेत्यर्थः । साध्वसान्नवसंगमभयादुपगतप्रकम्पया = वेपथुमत्या, नवदीक्षया = नवोद्वाहया कन्यया वरो वोढेव युज्यते संगच्छते । युजेर्दैवादिकत्वात्कर्तरि लट्
Summary
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"O lovely-faced one! This moon is being joined with its principal star (Yogatara), which has a flickering disc, just as a bridegroom is joined with a newly initiated bride who is trembling with nervousness."
सारांश
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हे सुंदर मुख वाली! चंद्रमा इस समय कांपती हुई आभा वाली योगतारा नक्षत्र से वैसे ही मिल रहा है, जैसे कोई वर संकोच से कांपती हुई वधू से मिलता है।
पदच्छेदः
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| एषः | एतद् (१.१) | This |
| चारुमुखि | चारु–मुखी (८.१) | O lovely-faced one |
| योगतारया | योग–तारा (३.१) | with its principal star |
| युज्यते | युज्यते (√युज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is being joined |
| तरलबिम्बया | तरल–बिम्बा (३.१) | which has a flickering disc |
| शशी | शशिन् (१.१) | moon |
| साध्वसात् | साध्वस (५.१) | out of nervousness |
| उपगतप्रकम्पया | उपगत–प्रकम्पा (३.१) | who is trembling |
| कन्यया | कन्या (३.१) | with a bride |
| इव | इव | like |
| नवदीक्षया | नव–दीक्षा (३.१) | newly initiated |
| वरः | वर (१.१) | a bridegroom |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ष | चा | रु | मु | खि | यो | ग | ता | र | या |
| यु | ज्य | ते | त | र | ल | बि | म्ब | या | श | शी |
| सा | ध्व | सा | दु | प | ग | त | प्र | क | म्प | या |
| क | न्य | ये | व | न | व | दी | क्ष | या | व | रः |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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