अन्वयः
AI
इयम् सतिमिरा चन्द्रिका उन्नत-अवनत-भाववत्तया गिरेः, बहुविधाभिः भक्तिभिः अर्पिता मत्तदन्तिनः भूतिः इव, भाति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
उन्नतेति । गिरेरुन्नतावनतभाववत्तया निम्नोन्नतप्रदेशवत्वेन हेतुना सतिमिरा तिमिरमिश्रा । समोन्नतेषु तमसोऽनवकाशादिति भावः । इयं चन्द्रिका बहुविधाभिर्भक्तिभी रचनाभिरर्पिता विन्यस्ता मत्तदन्तिनो भूतिर्भसितमिवाभाति । `भूतिर्मातङ्गश्रृङ्गारे` इति विश्वः । तत्र भक्तिसहितानि गजाङ्गान्येव तिमिरभागोपमेत्यनुसंधेयम्
Summary
AI
This moonlight, mixed with darkness due to the unevenness of the mountain's surface, shines like the sacred ash marking applied in various patterns on a rutting elephant.
सारांश
AI
पर्वत के ऊंचे-नीचे स्थानों पर अंधकार मिश्रित यह चांदनी, मदमस्त हाथी के शरीर पर सजी भस्म की रेखाओं के समान सुशोभित हो रही है।
पदच्छेदः
AI
| उन्नतावनतभाववत्तया | उन्नत–अवनत–भाववत्–ता (३.१) | due to its state of having high and low parts |
| चन्द्रिका | चन्द्रिका (१.१) | moonlight |
| सतिमिरा | स–तिमिर (१.१) | mixed with darkness |
| गिरेः | गिरि (६.१) | of the mountain |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| भक्तिभिः | भक्ति (३.३) | in patterns |
| बहुविधाभिः | बहु–विधा (३.३) | of various kinds |
| अर्पिता | अर्पित (√ऋ+णिच्+क्त, १.१) | applied |
| भाति | भाति (√भा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shines |
| भूतिः | भूति (१.१) | the sacred ash marking |
| इव | इव | like |
| मत्तदन्तिनः | मत्त–दन्तिन् (६.१) | of a rutting elephant |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | न्न | ता | व | न | त | भा | व | व | त्त | या |
| च | न्द्रि | का | स | ति | मि | रा | गि | रे | रि | यम् |
| भ | क्ति | भि | र्ब | हु | वि | धा | भि | र | र्पि | ता |
| भा | ति | भू | ति | रि | व | म | त्त | द | न्ति | नः |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.