कल्पवृक्षशिखरेषु संप्रति
प्रस्फुरद्भिरिव पश्य सुन्दरि ।
हारयष्टिगणनामिवांशुभिः
कर्तुमागतकुतूहलः शशी ॥

अन्वयः AI सुन्दरि! पश्य, शशी संप्रति कल्पवृक्षशिखरेषु प्रस्फुरद्भिः अंशुभिः हारयष्टिगणनाम् कर्तुम् आगतकुतूहलः इव भाति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) कल्पवृक्षेति । हे अविकल्पेनाविवादेन सुन्दरि अविवल्पसुन्दरि ! शशी संप्रति कल्पवृक्षाणां शिखरेष्वग्रेषु प्रस्फुरद्भिरंशुभिः । करस्थानीयैरिति भावः । हारयष्टिरशनां कल्पतरुलम्बिहारपरिगणनां कर्तुमुद्यतकुतूहल इवोत्पन्नकौतुकः किम् । इत्युत्प्रेक्षा
Summary AI "Look, beautiful one! The moon, with its rays now flickering on the tops of the Kalpa trees, seems to have become curious to count, as it were, the pearl necklaces hanging there."
सारांश AI हे सुंदरी! कल्पवृक्षों की चोटियों पर चमकती किरणों के साथ चंद्रमा मानों वहां लटकी मोतियों की मालाओं को गिनने के कौतूहल से आया है।
पदच्छेदः AI
कल्पवृक्षशिखरेषुकल्पवृक्षशिखर (७.३) on the tops of the Kalpa trees
संप्रतिसंप्रति now
प्रस्फुरद्भिःप्रस्फुरत् (प्र√स्फुर्+शतृ, ३.३) flickering
इवइव as if
पश्यपश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) Look
सुन्दरिसुन्दरी (८.१) beautiful one
हारयष्टिगणनाम्हारयष्टिगणना (२.१) the counting of pearl necklaces
इवइव as it were
अंशुभिःअंशु (३.३) with its rays
कर्तुम्कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) to do
आगतकुतूहलःआगतकुतूहल (१.१) has become curious
शशीशशिन् (१.१) the moon
छन्दः रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
ल्प वृ क्ष शि रे षु सं प्र ति
प्र स्फु द्भि रि श्य सु न्द रि
हा ष्टि ना मि वां शु भिः
र्तु मा कु तू लः शी
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