ईश्वरोऽपि दिवसात्ययोचितं
मन्त्रपूर्वमनुतस्थिवान्विधिम् ।
पार्वतीमवचनामसूयया
प्रत्युपेत्य पुनराह सस्मितम् ॥
ईश्वरोऽपि दिवसात्ययोचितं
मन्त्रपूर्वमनुतस्थिवान्विधिम् ।
पार्वतीमवचनामसूयया
प्रत्युपेत्य पुनराह सस्मितम् ॥
मन्त्रपूर्वमनुतस्थिवान्विधिम् ।
पार्वतीमवचनामसूयया
प्रत्युपेत्य पुनराह सस्मितम् ॥
अन्वयः
AI
ईश्वरः अपि दिवसात्यय-उचितम् मन्त्रपूर्वम् विधिम् अनुतस्थिवान्। सः असूयया अवचनाम् पार्वतीम् प्रत्युपेत्य पुनः सस्मितम् आह।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
ईश्वर इति । ईश्वरोऽपि दिवसात्ययोचितं सायंकालोचितं विधिं संध्यावन्दनकृत्यं मन्त्रपूर्वमनुतस्थिवाननुष्ठितवान् । तिष्ठतेः क्वसुप्रत्ययः । असूयया संध्यावन्दनजनितासूययाऽवचनामभाषमाणां पार्वतीं पुनः प्रत्युपेत्य सस्मितमाह
Summary
AI
Lord Shiva, having duly performed the evening rituals preceded by mantras, approached Parvati, who was silent out of jealousy, and spoke to her again with a smile.
सारांश
AI
शिव ने संध्या के समय के उचित मंत्र और अनुष्ठान पूर्ण किए। फिर ईर्ष्यावश चुप बैठी पार्वती के पास जाकर वे मुस्कुराते हुए बोले।
पदच्छेदः
AI
| ईश्वरः | ईश्वर (१.१) | Lord Shiva |
| अपि | अपि | also |
| दिवसात्ययोचितम् | दिवस–अत्यय–उचित (२.१) | the one appropriate for the end of the day |
| मन्त्रपूर्वम् | मन्त्र–पूर्व (२.१) | preceded by mantras |
| अनुतस्थिवान् | अनुतस्थिवत् (अनु√स्था+क्वसु, १.१) | performed |
| विधिम् | विधि (२.१) | the rite |
| पार्वतीम् | पार्वती (२.१) | to Parvati |
| अवचनाम् | अ–वचन (२.१) | who was silent |
| असूयया | असूया (३.१) | due to jealousy |
| प्रत्युपेत्य | प्रत्युपेत्य (प्रति+उप√इ+ल्यप्) | having approached |
| पुनः | पुनर् | again |
| आह | आह (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| सस्मितम् | स–स्मित (२.१) | with a smile |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ई | श्व | रो | ऽपि | दि | व | सा | त्य | यो | चि | तं |
| म | न्त्र | पू | र्व | म | नु | त | स्थि | वा | न्वि | धिम् |
| पा | र्व | ती | म | व | च | ना | म | सू | य | या |
| प्र | त्यु | पे | त्य | पु | न | रा | ह | स | स्मि | तम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.