अन्वयः
AI
रवौ संस्थिते सति खम् प्रसुप्तम् इव अस्ति। महतः तेजसः गतिः ईदृशी एव। तत् यावत् उद्गतम् प्रकाशयति, तावता मीलनाय च्युतम् खलु।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
खमिति । रवौ संस्थितेऽस्तमिते सति खं व्योम प्रसुप्तमिव निःप्रकाशत्वान्निद्रितमिव । स्थितमित्यर्थः । युज्यते चैतदित्याह । महतस्तेजस ईदृशी वक्ष्यमाणप्रकारा गतिः । स्वभाव इत्यर्थः । तां गतिमेवाह तदिति । तन्महत्तेज उत्थितं सद्यावत् । स्थानमिति शेषः । प्रकाशयति । तावताधश्च्युतं सत् । तत्स्थानादिति शेषः । मीलनाय संकोचाय खलु भवति । यत्र स्थाने तेजस्तिष्ठति तत्प्रकाशत इति स्थितिः । यतो गच्छति न तत्प्रकाशते । अतः सूर्यापाये खं प्रसुप्तमिवेति युक्तोत्प्रेक्षेति भावः । अस्यार्थस्य तेजोमात्रसाधारण्येऽपि महति स्फुटमिति महद्ग्रहणं कृतम्
Summary
AI
'With the sun having set, the sky seems asleep. Such is the fate of great energy: indeed, by as much as it rises to illuminate, by that much it must also fall to set.'
सारांश
AI
सूर्य के अस्त होने पर आकाश सो गया है। महान तेज की यही गति है—वह जितना प्रकाश फैलाने के लिए उदय होता है, उतनी ही शीघ्रता से अस्त होने के लिए गिर जाता है।
पदच्छेदः
AI
| खम् | ख (१.१) | The sky, |
| प्रसुप्तम् | प्रसुप्त (प्र√स्वप्+क्त, १.१) | asleep |
| इव | इव | as if, |
| संस्थिते | संस्थित (सम्√स्था+क्त, ७.१) | has set, |
| रवौ | रवि (७.१) | now that the sun |
| तेजसः | तेजस् (६.१) | of energy |
| महतः | महत् (६.१) | great |
| ईदृशी | ईदृश (१.१) | such |
| गतिः | गति (१.१) | is the fate: |
| तत् | तद् (१.१) | it, |
| प्रकाशयति | प्रकाशयति (प्र√काश् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | illuminates |
| यावत् | यावत् | as much as |
| उद्गतम् | उद्गत (उत्√गम्+क्त, १.१) | it has risen, |
| मीलनाय | मीलन (४.१) | for setting |
| खलु | खलु | indeed, |
| तावता | तावता | by that much |
| च्युतम् | च्युत (√च्यु+क्त, १.१) | it has fallen. |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| खं | प्र | सु | प्त | मि | व | सं | स्थि | ते | र | वौ |
| ते | ज | सो | म | ह | त | ई | दृ | शी | ग | तिः |
| त | त्प्र | का | श | य | ति | या | व | दु | द्ग | तं |
| मी | ल | ना | य | ख | लु | ता | व | त | श्च्यु | तम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.