पश्य पश्चिमदिगन्तलम्बिना
निर्मितं मितकथे विवस्वता ।
दीर्घया प्रतिमया सरोऽम्भसां
तापनीयमिव सेतुबन्धनम् ॥
पश्य पश्चिमदिगन्तलम्बिना
निर्मितं मितकथे विवस्वता ।
दीर्घया प्रतिमया सरोऽम्भसां
तापनीयमिव सेतुबन्धनम् ॥
निर्मितं मितकथे विवस्वता ।
दीर्घया प्रतिमया सरोऽम्भसां
तापनीयमिव सेतुबन्धनम् ॥
अन्वयः
AI
मितकथे! पश्चिमदिगन्तलम्बिना विवस्वता दीर्घया प्रतिमया सरःअम्भसाम् तापनीयम् सेतुबन्धनम् इव निर्मितम्, पश्य।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
पश्येति । हे मितकथे, हे मितभाषिणि ! एतेन स्वस्य तत्संलापने लौल्यं सूचयति । पश्चिमदिगन्तलम्बित्वादायतया प्रतिमया निजप्रतिबिम्बेन । `प्रतिमानं प्रतिबिम्बं प्रतिमा प्रतियातना प्रतिच्छाया । प्रतिकतिरर्चा पुंसि प्रतिनिधिरूपमोपमानं स्यात् ।` इत्यमरः (अमरकोशः २.९.९४ ) । सरोम्भसां तपनीयविकारस्तापनीयं हिरण्मयम् । `तपनीयं शातकुम्भम्` इत्यमरः (अमरकोशः २.९.९४ ) । सेतुबन्धननिमित्तम् । इवेत्युत्प्रेक्षा । अस्तमयसमये सरः पारावारिणामरुणमायतमर्कप्रतिबिम्बं हिरण्मयसेतुरिव दृश्यत इत्यर्थः । पश्येति वाक्यार्थः कर्म
Summary
AI
'O you of few words, see! The sun, hanging at the edge of the western horizon, has created with its long reflection in the lake waters what looks like a golden bridge.'
सारांश
AI
हे मितभाषिणी, देखो! पश्चिम दिशा में अस्त होते सूर्य ने सरोवर के जल पर अपनी लंबी परछाईं से मानो स्वर्ण का एक विशाल सेतु निर्मित कर दिया है।
पदच्छेदः
AI
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | See, |
| पश्चिमदिगन्तलम्बिना | पश्चिम–दिश–अन्त–लम्बिन् (√लम्ब्+णिनि, ३.१) | hanging at the edge of the western horizon, |
| निर्मितम् | निर्मित (निर्√मा+क्त, १.१) | is created, |
| मितकथे | मित (√मा+क्त)–कथा (८.१) | O you of few words! |
| विवस्वता | विवस्वत् (३.१) | by the sun, |
| दीर्घया | दीर्घ (३.१) | by its long |
| प्रतिमया | प्रतिमा (३.१) | reflection, |
| सरःअम्भसाम् | सरस्–अम्भस् (६.३) | in the lake waters, |
| तापनीयम् | तापनीय (१.१) | a golden |
| इव | इव | like |
| सेतुबन्धनम् | सेतु–बन्धन (१.१) | bridge. |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | श्य | प | श्चि | म | दि | ग | न्त | ल | म्बि | ना |
| नि | र्मि | तं | मि | त | क | थे | वि | व | स्व | ता |
| दी | र्घ | या | प्र | ति | म | या | स | रो | ऽम्भ | सां |
| ता | प | नी | य | मि | व | से | तु | ब | न्ध | नम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.