अन्वयः
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दुकूलवासाः सः विनीतैः अवरोधरक्षैः वधूसमीपम् निन्ये, नवैः चन्द्रपादैः स्फुटफेनराजिः उदन्वान् वेलासमीपम् इव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
दुकूलेति । अथ दुकूलं वसान इत्यर्थः । स हरो विनींतैरनुद्धतैरवरोधेषु ये दक्षास्तैरवरोधदक्षैर्वधूसमीपं निन्ये नीतः । कथमिव । स्फुटा फेनानां राजिर्यस्य स उदकमस्यास्तीत्युदन्वान्समुद्रः । `उदन्वानुदधौ च` (अष्टाध्यायी ८.२.१३ ) इति निपातनात्साधुः । नवैरचिरोदितैश्चन्द्रपादैश्चन्द्रकिरणैर्वेलासमीपमिव
Summary
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Clad in silk garments, he (Shiva) was led near the bride by the courteous palace guards, just as the ocean, with its distinct lines of foam, is drawn towards the shore by the new rays of the moon.
सारांश
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रेशमी वस्त्र धारण किए हुए शिव को रक्षकों ने वधू के समीप वैसे ही पहुँचाया, जैसे चंद्रमा की किरणें फेनिल समुद्र को तट तक ले जाती हैं।
पदच्छेदः
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| दुकूलवासाः | दुकूल–वासस् (१.१) | Clad in silk garments |
| सः | तद् (१.१) | he |
| वधूसमीपम् | वधू–समीप (२.१) | near the bride |
| निन्ये | निन्ये (√नी भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was led |
| विनीतैः | विनीत (वि√नी+क्त, ३.३) | by the courteous |
| अवरोधरक्षैः | अवरोध–रक्ष (३.३) | palace guards |
| वेलासमीपम् | वेला–समीप (२.१) | near the shore |
| स्फुटफेनराजिः | स्फुट–फेन–राजि (१.१) | with distinct lines of foam |
| नवैः | नव (३.३) | by the new |
| उदन्वान् | उदन्वत् (१.१) | the ocean |
| इव | इव | like |
| चन्द्रपादैः | चन्द्र–पाद (३.३) | rays of the moon |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दु | कू | ल | वा | साः | स | व | धू | स | मी | पं |
| नि | न्ये | वि | नी | तै | र | व | रो | ध | र | क्षैः |
| वे | ला | स | मी | पं | स्फु | ट | फे | न | रा | जि |
| र्न | वै | रु | द | न्वा | नि | व | च | न्द्र | पा | दैः |
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