तस्मिन्मुहूर्ते पुरसुन्दरीणा-
मीशानसंदर्शनलालसानाम् ।
प्रासादमालासु बभूवुरित्थं
त्यक्तान्यकार्याणि विचेष्टितानि ॥
तस्मिन्मुहूर्ते पुरसुन्दरीणा-
मीशानसंदर्शनलालसानाम् ।
प्रासादमालासु बभूवुरित्थं
त्यक्तान्यकार्याणि विचेष्टितानि ॥
मीशानसंदर्शनलालसानाम् ।
प्रासादमालासु बभूवुरित्थं
त्यक्तान्यकार्याणि विचेष्टितानि ॥
अन्वयः
AI
तस्मिन् मुहूर्ते ईशान-सन्दर्शन-लालसानाम् पुर-सुन्दरीणाम् प्रासाद-मालासु त्यक्त-अन्य-कार्याणि विचेष्टितानि इत्थम् बभूवुः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्मिन्निति । तस्मिन्मुहूर्ते हरपुरप्रवेशसमय ईशानस्य संदर्शने लालसानां लोलुपानाम् । `लोलुपो लोलुभो लोलो लालसो लम्पटश्च सः` इति यादवः । पुरसुन्दरीणां प्रासादमालास्वित्थं वक्ष्यमाणप्रकारेण त्यक्तान्यकार्याणि विमृष्टकार्यान्तराणि विचेष्टितानि व्यापाराः । `नपुंसके भावे क्तः` (अष्टाध्यायी ३.३.११४ ) इति क्तः । बभूवुरासन्
Summary
AI
At that moment, on the rows of palaces, the actions of the beautiful women of the city, who were eager to see Ishana (Shiva) and had abandoned all other tasks, were as follows.
सारांश
AI
उस क्षण शिव को देखने की लालसा में नगर की सुंदरियों ने अपने सभी कार्यों को बीच में ही छोड़ दिया और अटारियों की ओर दौड़ पड़ीं।
पदच्छेदः
AI
| तस्मिन् | तद् (७.१) | at that |
| मुहूर्ते | मुहूर्त (७.१) | moment |
| पुर-सुन्दरीणाम् | पुर–सुन्दरी (६.३) | of the beautiful women of the city |
| ईशान-सन्दर्शन-लालसानाम् | ईशान–सन्दर्शन–लालस (६.३) | who were eager to see Ishana (Shiva) |
| प्रासाद-मालासु | प्रासाद–माला (७.३) | on the rows of palaces |
| बभूवुः | बभूवुः (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | were |
| इत्थम् | इत्थम् | as follows |
| त्यक्त-अन्य-कार्याणि | त्यक्त (√त्यज्+क्त)–अन्य–कार्य (१.३) | having abandoned other tasks |
| विचेष्टितानि | विचेष्टित (१.३) | the actions |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | न्मु | हू | र्ते | पु | र | सु | न्द | री | णा |
| मी | शा | न | सं | द | र्श | न | ला | ल | सा | नाम् |
| प्रा | सा | द | मा | ला | सु | ब | भू | वु | रि | त्थं |
| त्य | क्ता | न्य | का | र्या | णि | वि | चे | ष्टि | ता | नि |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.