तमन्वगच्छत्प्रथमो विधाता
श्रीवत्सलक्ष्मा पुरुषश्च साक्षात् ।
जयेति वाचा महिमानमस्य
संवर्धयन्त्या हविषेव वह्निम् ॥
तमन्वगच्छत्प्रथमो विधाता
श्रीवत्सलक्ष्मा पुरुषश्च साक्षात् ।
जयेति वाचा महिमानमस्य
संवर्धयन्त्या हविषेव वह्निम् ॥
श्रीवत्सलक्ष्मा पुरुषश्च साक्षात् ।
जयेति वाचा महिमानमस्य
संवर्धयन्त्या हविषेव वह्निम् ॥
अन्वयः
AI
प्रथमः विधाता च साक्षात् श्रीवत्स-लक्ष्म पुरुषः च 'जय' इति संवर्धयन्त्या वाचा, हविषा वह्निम् इव, अस्य महिमानम् (संवर्धयन्तौ) तम् अन्वगच्छत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तमिति । प्रथम आद्यो विधाता चतुर्मुखस्तथा श्रीवत्सलक्ष्मा श्रीवत्साङ्कः पुरुषो विष्णुश्च साक्षात्तं देवमभ्यगच्छत्संमुखमाययौ । किं कुर्वन्ती । जयेति वाचा जयशब्देनास्येश्वरस्य महिमानं महत्वं हविषा वह्निमिव संवर्धयन्तौ वृद्धिं गमयन्तौ
Summary
AI
The first creator, Brahma, and the Supreme Being Vishnu himself, marked with the Shrivatsa, followed him. With their cries of "Victory!", they augmented his glory, just as an oblation of ghee increases a fire.
सारांश
AI
ब्रह्मा और विष्णु 'जय' घोष करते हुए शिव के पीछे चले, जिससे शिव की महिमा वैसे ही बढ़ गई जैसे घी से अग्नि की लपटें बढ़ जाती हैं।
पदच्छेदः
AI
| तम् | तद् (२.१) | him |
| अन्वगच्छत् | अन्वगच्छत् (अनु√गम् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | followed |
| प्रथमः | प्रथम (१.१) | the first |
| विधाता | विधातृ (१.१) | creator (Brahma) |
| श्रीवत्स-लक्ष्म | श्रीवत्स–लक्ष्मन् (१.१) | the one marked with Shrivatsa |
| पुरुषः | पुरुष (१.१) | the Supreme Being (Vishnu) |
| च | च | and |
| साक्षात् | साक्षात् | in person |
| जय | जय (√जि कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be victorious |
| इति | इति | thus |
| वाचा | वाच् (३.१) | with speech |
| महिमानम् | महिमन् (२.१) | the glory |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| संवर्धयन्त्या | संवर्धयन्ती (सम्√वृध्+णिच्+शतृ, ३.१) | increasing |
| हविषा | हविस् (३.१) | with an oblation |
| इव | इव | like |
| वह्निम् | वह्नि (२.१) | a fire |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | म | न्व | ग | च्छ | त्प्र | थ | मो | वि | धा | ता |
| श्री | व | त्स | ल | क्ष्मा | पु | रु | ष | श्च | सा | क्षात् |
| ज | ये | ति | वा | चा | म | हि | मा | न | म | स्य |
| सं | व | र्ध | य | न्त्या | ह | वि | षे | व | व | ह्निम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.