इत्यद्भुतैकप्रभवः प्रभावा-
त्प्रसिद्धनेपथ्यविधेर्विधाता ।
आत्मानमासन्नगणोपनीते
खड्गे निषक्तप्रतिमं ददर्श ॥
इत्यद्भुतैकप्रभवः प्रभावा-
त्प्रसिद्धनेपथ्यविधेर्विधाता ।
आत्मानमासन्नगणोपनीते
खड्गे निषक्तप्रतिमं ददर्श ॥
त्प्रसिद्धनेपथ्यविधेर्विधाता ।
आत्मानमासन्नगणोपनीते
खड्गे निषक्तप्रतिमं ददर्श ॥
अन्वयः
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इति अद्भुत-एक-प्रभवः, प्रसिद्ध-नेपथ्य-विधेः विधाता (सः हरः) प्रभावात् आसन्न-गण-उपनीते खड्गे निषक्त-प्रतिमम् आत्मानम् ददर्श।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इतीति । इतीर्त्थ प्रभावात्सामर्थ्यात्प्रसिद्धस्य नेपथ्यविधेर्वेषसंविधानस्य विधाता निर्माता । अत एवाद्भुतानामाश्चर्याणामेकप्रभवो मुख्यनिधिः स देव आसन्नगणेन पार्श्वस्थवर्गेण । प्रमथगणेनेत्यर्थः । उपनीत आनीते खड्गे निषक्तप्रतिमं संक्रान्तप्रतिबिम्बमात्मानं ददर्श । वीरपुरुषाणामेष आचारः
Summary
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Thus, Shiva, the sole source of wonders and the ordainer of even the established rules of attire, by his divine power, saw his own reflection in a sword brought to him by a nearby attendant.
सारांश
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संपूर्ण शृंगार के विधाता शिव ने समीप खड़े गण द्वारा पकड़ी गई तलवार के स्वच्छ फलक में अपने दिव्य स्वरूप का प्रतिबिंब देखा।
पदच्छेदः
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| इति | इति | thus |
| अद्भुत-एक-प्रभवः | अद्भुत–एक–प्रभव (१.१) | the sole source of wonders |
| प्रभावात् | प्रभाव (५.१) | by his power |
| प्रसिद्ध-नेपथ्य-विधेः | प्रसिद्ध–नेपथ्य–विधि (६.१) | of the well-known rules of attire |
| विधाता | विधातृ (१.१) | the ordainer |
| आत्मानम् | आत्मन् (२.१) | himself |
| आसन्न-गण-उपनीते | आसन्न–गण–उपनीत (७.१) | in the one brought near by an attendant |
| खड्गे | खड्ग (७.१) | in the sword |
| निषक्त-प्रतिमम् | निषक्त–प्रतिम (२.१) | with his reflection cast upon it |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | saw |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | त्य | द्भु | तै | क | प्र | भ | वः | प्र | भा | वा |
| त्प्र | सि | द्ध | ने | प | थ्य | वि | धे | र्वि | धा | ता |
| आ | त्मा | न | मा | स | न्न | ग | णो | प | नी | ते |
| ख | ड्गे | नि | ष | क्त | प्र | ति | मं | द | द | र्श |
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