अन्वयः
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अरुन्धती प्रणाम-आदर-स्रस्त-जाम्बूनद-अवतंसकाम् लज्जमानाम् ताम् अङ्कम् आरोपयामास ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तामिति । प्रणामादरेण नमस्कारासक्त्या स्रस्ते जाम्बूनदे सुवर्णविकारौ वतंसके कनककुण्डले यस्यास्तां लज्जमानां तामम्बिकामरुन्धत्यङ्कमारोपयामास । `रुहः पोऽन्यतरस्याम्` (अष्टाध्यायी ७.३.४३ ) इति पकारः
Summary
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Arundhati placed the blushing Parvati, whose golden ear-ornament had slipped due to her respectful bow, onto her lap.
सारांश
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प्रणाम करते समय आदरवश जिनके सुवर्ण के कुंडल खिसक गए थे, उन लज्जाशील पार्वती को अरुंधती ने अपनी गोद में बिठा लिया।
पदच्छेदः
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| ताम् | तद् (२.१) | her |
| प्रणामादरस्रस्तजाम्बूनदवतंसकाम् | प्रणाम–आदर–स्रस्त (√स्रंस्+क्त)–जाम्बूनद–अवतंसक (२.१) | whose golden ear-ornament had slipped due to her respectful bow |
| अङ्कम् | अङ्क (२.१) | onto her lap |
| आरोपयामास | आरोपयामास (आ√रुह् +णिच्+लिट् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | placed |
| लज्जमानाम् | लज्जमान (√लज्ज्+शानच्, २.१) | the blushing one |
| अरुन्धती | अरुन्धती (१.१) | Arundhati |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | प्र | णा | मा | द | र | स्र | स्त |
| जा | म्बू | न | द | व | तं | स | काम् |
| अ | ङ्क | मा | रो | प | या | मा | स |
| ल | ज्ज | मा | ना | म | रु | न्ध | ती |
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