अन्वयः
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महीधरः एतावत् उक्त्वा तनयाम् ऋषीन् आह, 'इयम् त्रिलोचनवधूः वः सर्वान् नमति' इति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
एतावदिति । महीधरो हिमवांस्तनयामेतावत्पूर्वोक्तमुक्त्वार्षीनाह-किमिति । इयं त्रिलोचनवधूस्त्र्यम्बकपत्नी वः सर्वान्नमतीति । त्रिलोचनवधूरितिसिद्धवदभिधानेनाविप्रतिपन्नं दानमिति सूचयति
Summary
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The mountain (Himalaya), having said this much to his daughter, told the sages, "This bride of the three-eyed one (Shiva) bows to all of you."
सारांश
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पुत्री से ऐसा कहकर हिमालय ने ऋषियों से कहा कि भगवान शिव की यह होने वाली वधू आप सभी को प्रणाम कर रही है।
पदच्छेदः
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| एतावत् | एतावत् | this much |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच्+क्त्वा) | having said |
| तनयाम् | तनया (२.१) | to his daughter |
| ऋषीन् | ऋषि (२.३) | the sages |
| आह | आह (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| महीधरः | मही–धर (१.१) | the mountain (Himalaya) |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| नमति | नमति (√नम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bows to |
| वः | युष्मद् (२.३) | you all |
| सर्वान् | सर्व (२.३) | all |
| त्रिलोचनवधूः | त्रिलोचन–वधू (१.१) | the bride of the three-eyed one (Shiva) |
| इति | इति | thus |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ता | व | दु | क्त्वा | त | न | या |
| मृ | षी | ना | ह | म | ही | ध | रः |
| इ | यं | न | म | ति | वः | स | र्वां |
| स्त्रि | लो | च | न | व | धू | रि | ति |
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