अन्वयः
AI
"इदम् अत्र न्याय्यम् उत्तरम्" इति बुद्ध्या विमृश्य, सः वचसाम् अन्ते मङ्गल-अलङ्कृताम् सुताम् आददे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इदमिति । स हिमवान्वचसामन्ते मुनिवाक्यावसानेऽत्र मुनिवाक्य इदमुत्तरश्लोके वक्ष्यमाणं दानमेव न्याय्यं न्यायादनपेतमुत्तरमिति बुद्ध्या चित्तेन विमृश्य विचिन्त्य मङ्गलं यथा तथालंकृतां सुतामाददे हस्ताभ्यां जग्राह
Summary
AI
Reflecting that this was the proper response, Himalaya, at the conclusion of the sages' speech, took his daughter, who was adorned with auspicious ornaments, by the hand (as a sign of giving her away).
सारांश
AI
यही उचित उत्तर है, ऐसा विचार कर हिमालय ने अपनी वाणी को विराम देते हुए मंगल कार्यों के लिए सुसज्जित अपनी पुत्री का हाथ थाम लिया।
पदच्छेदः
AI
| इदम् | इदम् (१.१) | This |
| अत्र | अत्र | here |
| उत्तरम् | उत्तर (१.१) | response |
| न्याय्यम् | न्याय्य (१.१) | is proper |
| इति | इति | thus |
| बुद्ध्या | बुद्धि (३.१) | with his mind |
| विमृश्य | विमृश्य (वि√मृश्+ल्यप्) | having reflected |
| सः | तद् (१.१) | he |
| आददे | आददे (आ√दा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | took |
| वचसाम् | वचस् (६.३) | of the words |
| अन्ते | अन्त (७.१) | at the end |
| मङ्गलालङ्कृताम् | मङ्गल–अलङ्कृत (अलम्√कृ+क्त, २.१) | adorned with auspicious ornaments |
| सुताम् | सुता (२.१) | his daughter |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | द | म | त्रो | त्त | रं | न्या | य्य |
| मि | ति | बु | द्ध्या | वि | मृ | श्य | सः |
| आ | द | दे | व | च | सा | म | न्ते |
| म | ङ्ग | ला | ल | ङ्कृ | तां | सु | ताम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.