एवं वादिनि देवर्षौ पार्श्वे पितुरधोमुखी ।
लीलाकमलपत्राणि गणयामास पार्वती ॥

अन्वयः AI देवर्षौ एवम् वादिनि (सति), पितुः पार्श्वे अधोमुखी पार्वती लीला-कमल-पत्राणि गणयामास।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) एवमिति । देवर्षावङ्गिरस्येवंवादिनि सति पार्वती पितुः पार्श्वेऽधोमुखी सती । लज्जयेति शेषः । लीलाकमलपत्राणि गणयामास संचख्यौ । लज्जावशात्कमलदलगणनाव्याजेन हर्ष जुगोपेत्यर्थः । अनेनावहित्याख्यः संचारी भाव उक्तः । तदुक्तम्- `अवहित्था तु लज्जादेर्हर्षादाकारगोपनम्` । इति
Summary AI As the divine sage (Angiras) spoke these words, Parvati, standing by her father's side with her face downcast in modesty, began to count the petals of the lotus she held in her hand.
सारांश AI देवर्षि के ऐसा कहने पर पिता के पास खड़ी पार्वती ने सिर झुकाकर अपने हाथ के लीला-कमल की पंखुड़ियों को गिनना शुरू कर दिया।
पदच्छेदः AI
एवम्एवम् Thus
वादिनिवादिन् (७.१) while speaking
देवर्षौदेवर्षि (७.१) the divine sage
पार्श्वेपार्श्व (७.१) at the side
पितुःपितृ (६.१) of her father
अधोमुखीअधोमुखी (१.१) with face downcast
लीलाकमलपत्राणिलीलाकमल–पत्र (२.३) the petals of her play-lotus
गणयामासगणयामास (√गण् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) counted
पार्वतीपार्वती (१.१) Parvati
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
वं वा दि नि दे र्षौ
पा र्श्वे पि तु धो मु खी
ली ला त्रा णि
या मा पा र्व ती
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.