अन्वयः
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हि ईशः जगतः पिता (अस्ति)। (अतः) एतानि स्थावराणि चराणि च भूतानि एनाम् मातरम् कल्पयन्ति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
यावन्तीति । स्थावराणि चराणि च यावन्त्येतानि भूतानि सन्तीति शेषः । सर्वाणि भूतानीत्यर्थः । एनां ते दुहितरं मातरं कल्पयन्तु । हि यस्मादीशो जगतः पिता । पितृदारेषु मातृभावो न्याय्य इति भावः
Summary
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Since the Lord (Shiva) is the father of the world, all beings, both stationary and moving, will regard her as their mother.
सारांश
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समस्त चराचर प्राणी पार्वती को अपनी माता मानें, क्योंकि भगवान शिव ही संपूर्ण जगत के पिता हैं।
पदच्छेदः
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| यावत् | यावत् | All |
| एतानि | एतद् (१.३) | these |
| भूतानि | भूत (१.३) | beings |
| स्थावराणि | स्थावर (१.३) | stationary |
| चराणि | चर (१.३) | and moving |
| च | च | and |
| मातरम् | मातृ (२.१) | as their mother |
| कल्पयन्ति | कल्पयन्ति (√कॢप् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | will regard |
| एनाम् | एतद् (२.१) | her |
| ईशः | ईश (१.१) | the Lord (Shiva) |
| हि | हि | since |
| जगतः | जगत् (६.१) | of the world |
| पिता | पितृ (१.१) | is the father |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | व | दे | ता | नि | भू | ता | नि |
| स्था | व | रा | णि | च | रा | णि | च |
| मा | त | रं | क | ल्प | य | न्त्ये | ना |
| मी | शो | हि | ज | ग | तः | पि | ता |
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