अन्वयः
AI
(ते) प्रलयापदि आसक्तबाहुलतया भुवा सार्धम् उद्धृतया महावराहदंष्ट्रायाम् विश्रान्ताः (आसन्) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
आसक्तेति । पुनः किंविधाः । प्रलयापदि कल्पान्तसंकट आसक्तबाहुलतया । दंष्ट्रायामिति शेषः । उद्धृतया । दंष्ट्रयेति शेषः । भुवा सार्धं धरण्या सह महावराहदंष्ट्रायां विश्रान्ताः । महाप्रलयेऽप्यविनाशिन इत्यर्थः
Summary
AI
During the calamity of the cosmic deluge, they had rested on the tusk of the great boar (Vishnu's Varaha avatar), along with the Earth who was lifted up, clinging to it like a creeper-like arm.
सारांश
AI
प्रलय के समय पृथ्वी के डूबने पर, वे ऋषि भगवान महावराह की दाढ़ पर टिकी हुई और ऊपर उठी हुई पृथ्वी का सहारा लेकर विश्राम करते थे।
पदच्छेदः
AI
| आसक्तबाहुलतया | आसक्त–बाहुलता (३.१) | clinging like a creeper-like arm |
| सार्धम् | सार्धम् | along with |
| उद्धृतया | उद्धृत (उद्√धृ+क्त, ३.१) | lifted up |
| भुवा | भू (३.१) | the Earth |
| महावराहदंष्ट्रायाम् | महावराह–दंष्ट्रा (७.१) | on the tusk of the great boar |
| विश्रान्ताः | विश्रान्त (वि√श्रम्+क्त, १.३) | had rested |
| प्रलयापदि | प्रलय–आपद् (७.१) | during the calamity of the deluge |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | स | क्त | बा | हु | ल | त | या |
| सा | र्ध | मु | द्धृ | त | या | भु | वा |
| म | हा | व | रा | ह | दं | ष्ट्रा | यां |
| वि | श्रा | न्ताः | प्र | ल | या | प | दि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.