गगनादवतीर्णा सा यथावृद्धपुरस्सरा ।
तोयान्तर्भास्करालीव रेजे मुनिपरम्परा ॥

अन्वयः AI गगनात् अवतीर्णा यथावृद्धपुरस्सरा सा मुनिपरम्परा तोयान्तर्भास्कराली इव रेजे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) गगनादिति । गगनादवतीर्णावरुढा यथावृद्धं वृद्धानुक्रमेण स्थिताः पुरःसरा अग्रेसरा यस्यां सा तथोक्ता । अनुपसर्जनाधिकारान्न ङीप् । सा मुनिपरम्परा मुनिपंक्तिस्तोयान्तस्तोयाभ्यन्तरे भास्कराली प्रतिबिम्बितार्कपङ्क्तिरिव रेजे । एतेन मुनीनां तेजस्वित्वेऽपि सुखसंदर्शनं सूचयति । भास्कराणां भूयिष्ठत्वसंभावनार्थ तोयान्तरित्युक्तम् । अतएव बहुत्वसिद्धिश्च
Summary AI That procession of sages, descending from the sky with the eldest leading according to seniority, shone like a series of suns reflected in water.
सारांश AI आकाश से उतरती हुई और सबसे वृद्ध मुनि के नेतृत्व वाली वह ऋषियों की पंक्ति, जल के भीतर प्रतिबिंबित सूर्य की किरणों की कतार के समान सुशोभित हुई।
पदच्छेदः AI
गगनात्गगन (५.१) from the sky
अवतीर्णाअवतीर्ण (अव√तृ+क्त, १.१) descended
सातद् (१.१) that
यथावृद्धपुरस्सरायथावृद्ध–पुरस्सर (१.१) with the eldest at the front according to seniority
तोयान्तर्भास्करालीवतोयअन्तर्भास्करआलीइव like a row of suns reflected inside water
रेजेरेजे (√राज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) shone
मुनिपरम्परामुनिपरम्परा (१.१) the procession of sages
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
ना ती र्णा सा
था वृ द्ध पु स्स रा
तो या न्त र्भा स्क रा ली
रे जे मु नि म्प रा
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