अन्वयः
AI
यत्र दुर्दिनेषु नक्तम् औषधिप्रकाशेन दर्शितसंचराः अभिसारिकाः तमिस्राणाम् अनभिज्ञाः (भवन्ति) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
यत्रेति । यत्र पुरे दुर्दिनेषु मेधाच्छन्नदिवसेषु नक्तमोषधीनां तृणज्योतिषां प्रकाशेन संचरन्त एभिरिति संचराः पन्थानः । `गोचरसंचर` इत्यादिना घप्रत्ययान्तो निपातः दर्शितसंचारः प्रकाशितमार्गा अभिसारिकाः कान्तार्थिन्यः । `कान्तार्थिनी तु या याति संकेतं साभिसारिका` इत्यमरः (अमरकोशः २.६.१० ) । तमिस्राणां तमसाम् । कृद्योगात्कर्मणि षष्ठी । अनभिज्ञाः । तमांसि नाभिजानन्तीत्यर्थः
Summary
AI
There, women going to meet their lovers are unaware of darkness, as even on cloudy nights, their paths are illuminated by the natural glow of medicinal herbs.
सारांश
AI
जहाँ ओषधियों के दिव्य प्रकाश से रात में मार्ग दिखाई देने के कारण, अभिसारिकाएँ बादलों वाले घोर अंधकार के दिनों में भी अंधेरे के कष्ट से अनभिज्ञ रहती हैं।
पदच्छेदः
AI
| यत्र | यत्र | where |
| औषधिप्रकाशेन | ओषधि–प्रकाश (३.१) | by the light of luminous herbs |
| नक्तं | नक्तम् | at night |
| दर्शितसंचराः | दर्शित (√दृश्+णिच्+क्त)–संचर (१.३) | whose paths are shown |
| अनभिज्ञाः | नञ्–अभिज्ञ (अभि√ज्ञा+क, १.३) | are unaware |
| तमिस्राणाम् | तमिस्रा (६.३) | of the darkness |
| दुर्दिनेषु | दुर्दिन (७.३) | on cloudy days |
| अभिसारिकाः | अभिसारिका (१.३) | the women going to a tryst |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | त्रौ | ष | धि | प्र | का | शे | न |
| न | क्तं | द | र्शि | त | सं | च | राः |
| अ | न | भि | ज्ञा | स्त | मि | स्रा | णां |
| दु | र्दि | ने | ष्व | भि | सा | रि | काः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.