अन्वयः
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उन्नतेन, स्थिति-मता, भुवः धुरम् उद्वहता तेन योजित-संबन्धम् माम् अपि अवञ्चितम् वित्त ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
उन्नतेनेति । उन्नतेन प्रांशुना प्रसिद्धेन च स्थितिमता प्रतिष्ठावता भुवो धुरं भारमुद्वहता । निर्वाहकेणेत्यर्थः । तेन हिमवता योजितः संबन्धो यौनसंबन्धो यस्य तं मामप्यवञ्चितमव्यामोहितं वित्त जानीति । `विद ज्ञाने` इति धातोर्लोट्
Summary
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Know that I too, by forming a relationship with him—who is lofty, steadfast, and bears the burden of the earth—will not be making an unworthy connection.
सारांश
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पृथ्वी का भार ढोने वाले, महान और स्थिर हिमालय के साथ सम्बन्ध जुड़ने पर आप मुझे भी कृतार्थ और सफल-मनोरथ समझिए।
पदच्छेदः
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| उन्नतेन | उन्नत (उद्√नम्+क्त, ३.१) | by the lofty |
| स्थितिमता | स्थितिमत् (३.१) | by the steadfast |
| धुरम् | धुर् (२.१) | the yoke |
| उद्वहता | उद्वहत् (उद्√वह्+शतृ, ३.१) | by the one bearing |
| भुवः | भू (६.१) | of the earth |
| तेन | तद् (३.१) | with him |
| योजितसंबन्धम् | योजित (√युज्+णिच्+क्त)–संबन्ध–योजितसंबन्ध (२.१) | one whose relationship is joined |
| वित्त | वित्त (√विद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | know |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| अपि | अपि | also |
| अवञ्चितम् | अवञ्चित (अ√वञ्च्+क्त, २.१) | as not deceived |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | न्न | ते | न | स्थि | ति | म | ता |
| धु | र | मु | द्व | ह | ता | भु | वः |
| ते | न | यो | जि | त | सं | ब | न्धं |
| वि | त्त | मा | म | प्य | व | ञ्चि | तम् |
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