अन्वयः
AI
युष्माभिः अस्मत्-अर्थे ताम् (दातुम्) हिमालयः याचितव्यः । सत्-अनुष्ठिताः संबन्धाः विक्रियायै न कल्पन्ते ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तामिति । अस्मदर्थेऽस्मत्प्रयोजने निमित्ते सति युष्माभिस्तां पार्वतीं हिमालयो हिमवान्याचितव्यः । याचेर्दुहादित्वादप्रधाने कर्मणि तव्यप्रत्ययः । आवश्यकं चैतदित्यह-सद्भिः सत्पुरुषैरनुष्ठिताः संघटिताः संबन्धाः यौनादयो विक्रियायै वैकल्योत्पादनाय न कल्पन्ते न पर्याप्नुवन्ति । न समर्था इत्यर्थः । अलमर्थयोगाच्चतुर्थी
Summary
AI
For my sake, Himalaya should be requested by you for her hand. Relationships formed with good people do not lead to estrangement.
सारांश
AI
आप मेरे निमित्त हिमालय से पार्वती की याचना करें। श्रेष्ठ व्यक्तियों द्वारा विधिवत स्थापित किए गए सम्बन्ध कभी विफल या विकृत नहीं होते।
पदच्छेदः
AI
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| अस्मदर्थे | अस्मद्–अर्थ–अस्मदर्थ (७.१) | for my sake |
| युष्माभिः | युष्मद् (३.३) | by you |
| याचितव्यः | याचितव्य (√याच्+तव्य, १.१) | should be requested |
| हिमालयः | हिमालय (१.१) | Himalaya |
| विक्रियायै | विक्रिया (४.१) | for estrangement |
| न | न | not |
| कल्पन्ते | कल्पन्ते (√कॢप् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | lead to |
| संबन्धाः | संबन्ध (१.३) | Relationships |
| सदनुष्ठिताः | सत्–अनुष्ठित (अनु√स्था+क्त)–सदनुष्ठित (१.३) | formed with good people |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | म | स्म | द | र्थे | यु | ष्मा | भि |
| र्या | चि | त | व्यो | हि | मा | ल | यः |
| वि | क्रि | या | यै | न | क | ल्प | न्ते |
| सं | ब | न्धाः | स | द | नु | ष्ठि | ताः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.