अन्वयः
AI
अतः अहम् हविः-भोक्तुः उत्पत्तये यजमानः अरणिम् इव, आत्म-जन्मने पार्वतीम् आहर्तुम् इच्छामि ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अत इति । अतः सुरप्रार्थितत्वाद्धेतोरात्मने पुत्राय । पुत्रमुत्पादयितुमित्यर्थः । `कियार्थोपपदस्ये-` त्यादिना चतुर्थी । पार्वतीं यजमानो यष्टा । `पूङ्यजोः शानन्` (अष्टाध्यायी ३.२.१२८ ) इति शानन्प्रत्ययः । हविर्भोक्तुरग्नेरुत्पतयेऽरणिमग्निमन्थनादारुविशेषमिव । `निर्मन्थ्यदारुणि त्वरणिर्द्वयोः` इत्यमरः (अमरकोशः २.७.२१ ) । आहर्तुं संग्रहीतुमिच्छामि॥ ६.२८ ॥
Summary
AI
Therefore, for the sake of my own progeny, I wish to accept Parvati, just as a sacrificer takes the Arani wood for the production of fire, the consumer of oblations.
सारांश
AI
इसलिए, पुत्र की उत्पत्ति के लिए मैं पार्वती को उसी प्रकार ग्रहण करना चाहता हूँ, जैसे यजमान यज्ञ की अग्नि प्रकट करने के लिए अरणि काष्ठ लेता है।
पदच्छेदः
AI
| अतः | अतस् | Therefore |
| आहर्तुम् | आहर्तुम् (आ√हृ+तुमुन्) | to accept |
| इच्छामि | इच्छामि (√इष् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I wish |
| पार्वतीम् | पार्वती (२.१) | Parvati |
| आत्मजन्मने | आत्मन्–जन्मन्–आत्मजन्मन् (४.१) | for my own progeny |
| उत्पत्तये | उत्पत्ति (४.१) | for the production |
| हविर्भोक्तुः | हविस्–भोक्तृ–हविर्भोक्तृ (६.१) | of the consumer of oblations (fire) |
| यजमानः | यजमान (१.१) | a sacrificer |
| इव | इव | like |
| अरणिम् | अरणि (२.१) | the Arani wood |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | त | आ | ह | र्तु | मि | च्छा | मि |
| पा | र्व | ती | मा | त्म | ज | न्म | ने |
| उ | त्प | त्त | ये | ह | वि | र्भो | क्तु |
| र्य | ज | मा | न | इ | वा | र | णिम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.