अन्वयः
AI
अथ परमेश्वरः मौलि-गतस्य इन्दोः तन्वीम् प्रभाम् विशदैः दशन-अंशुभिः उपचिन्वन् प्रति-आह ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति । अथ परमेश्वरो मौलिगतस्येन्दोस्तन्वीमल्पाम् । कलामात्रत्वादिति भावः । प्रभां कान्तिं विशदैः शुभ्रैर्दशनांशुभिरुपचिन्वन्वर्धयन्प्रत्याह । प्रत्युवाचेत्यर्थः
Summary
AI
Then the Supreme Lord, augmenting the slender splendor of the moon on his crown with the bright rays of his teeth (from his smile), replied.
सारांश
AI
तब मस्तक पर स्थित चन्द्रमा की मन्द आभा को अपनी उज्ज्वल दन्त-किरणों से बढ़ाते हुए परमेश्वर शिव ने उत्तर देना आरम्भ किया।
पदच्छेदः
AI
| अथ | अथ | Then |
| मौलिगतस्य | मौलि–गत–मौलिगत (६.१) | of the one situated on the crown |
| इन्दोः | इन्दु (६.१) | of the moon |
| विशदैः | विशद (३.३) | with bright |
| दशनांशुभिः | दशन–अंशु–दशनांशु (३.३) | with the rays of his teeth |
| उपचिन्वन् | उपचिन्वत् (उप√चि+शतृ, १.१) | augmenting |
| प्रभाम् | प्रभा (२.१) | the splendor |
| तन्वीम् | तनु (२.१) | slender |
| प्रत्याह | प्रत्याह (प्रति√आह कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | replied |
| परमेश्वरः | परम–ईश्वर–परमेश्वर (१.१) | the Supreme Lord |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | मौ | लि | ग | त | स्ये | न्दो |
| र्वि | श | दै | र्द | श | नां | शु | भिः |
| उ | प | चि | न्व | न्प्र | भां | त | न्वीं |
| प्र | त्या | ह | प | र | मे | श्व | रः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.