अन्वयः
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शर्वे पार्वतीम् प्रति धर्मेण अपि पदम् कारिते (सति), पूर्व-अपराध-भीतस्य कामस्य मनः उच्छ्वासितम् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
धर्मेणेति । धर्मेण दारसंजिवृक्षालक्षणेनापि कर्त्रा । शर्वे ईश्वरे पार्वतीं प्रति पदं कारिते सति । `हृक्रोरन्यतरस्याम्` (अष्टाध्यायी १.४.५३ ) इति शर्वस्याणिकर्तुः कर्मत्वम् । पूर्वापराधभीतस्य कामस्य मन उच्छ्वसितम् । पुनरुज्जीवनावकाशो भवतीति सप्रत्याशमभूदित्यर्थः
Summary
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When Shiva was made to take a step towards Parvati, even if through righteousness, the mind of Kama, who was fearful due to his previous offense, was revived and breathed a sigh of relief.
सारांश
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जब धर्म की प्रेरणा से शिव का मन पार्वती की ओर प्रवृत्त हुआ, तब अपने पुराने अपराध से डरे हुए कामदेव ने राहत की साँस ली।
पदच्छेदः
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| धर्मेण | धर्म (३.१) | through righteousness |
| अपि | अपि | even |
| पदम् | पद (२.१) | a step |
| शर्वे | शर्व (७.१) | by Sharva (Shiva) |
| कारिते | कारित (√कृ+णिच्+क्त, ७.१) | when was made to take |
| पार्वतीम् | पार्वती (२.१) | Parvati |
| प्रति | प्रति | towards |
| पूर्वापराधभीतस्य | पूर्व–अपराध–भीत (√भी+क्त)–पूर्वापराधभीत (६.१) | of him who was afraid of his previous offense |
| कामस्य | काम (६.१) | of Kama |
| उच्छ्वासितम् | उच्छ्वासित (उद्√श्वस्+क्त, १.१) | was revived |
| मनः | मनस् (१.१) | the mind |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ध | र्मे | णा | पि | प | दं | श | र्वे |
| का | रि | ते | पा | र्व | तीं | प्र | ति |
| पू | र्वा | प | रा | ध | भी | त | स्य |
| का | म | स्यो | च्छ्वा | सि | तं | म | नः |
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