अन्वयः
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तत् दर्शनात् शम्भोः दारार्थम् भूयान् आदरः अभूत् । खलु धर्म्याणाम् क्रियाणाम् सत्पत्न्यः मूलसाधनम् (भवन्ति) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तदिति । तद्दर्शनादरुन्धतीदर्शनाच्छंभोर्दारार्यं परिग्रहार्थमादरो भूयान्बहुतरोऽभूत् । ननु दाराः कुत्रोपयुज्यन्त इत्यत्राह--धर्म्याणां धर्मादनपेतानाम् । `धर्मपथ्यर्थन्यायादनपेते` (अष्टाध्यायी ४.४.९२ ) इति यत्प्रत्ययः । क्रियामाणानामिज्यादीनां सत्यः पतिव्रताः पत्न्यः सत्पत्न्यः । `पत्युर्नो यज्ञसंयोगे` (अष्टाध्यायी ४.१.३३ ) इति ङीप् । नकारश्च । मूलकारणं खलु
Summary
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Seeing them, Shambhu's respect for taking a wife grew even greater. Indeed, virtuous wives are the primary means for performing righteous activities.
सारांश
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अरुंधती को देखकर शिव के मन में विवाह के प्रति उत्साह बढ़ गया, क्योंकि धार्मिक कार्यों के संपादन के लिए श्रेष्ठ पत्नियाँ ही मुख्य साधन होती हैं।
पदच्छेदः
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| तद्दर्शनात् | तद्–दर्शन (५.१) | From seeing them |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| शम्भोः | शम्भु (६.१) | Shambhu's |
| भूयान् | भूयस् (१.१) | greater |
| दारार्थम् | दार–अर्थम् (२.१) | for taking a wife |
| आदरः | आदर (१.१) | respect |
| क्रियाणाम् | क्रिया (६.३) | of activities |
| खलु | खलु | Indeed |
| धर्म्याणाम् | धर्म्य (६.३) | righteous |
| सत्पत्न्यः | सत्–पत्नी (१.३) | virtuous wives |
| मूलसाधनम् | मूल–साधन (१.१) | are the primary means |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द्द | र्श | ना | द | भू | च्छ | म्भो |
| र्भू | या | न्दा | रा | र्थ | मा | द | रः |
| क्रि | या | णां | ख | लु | ध | र्म्या | णां |
| स | त्प | त्न्यो | मू | ल | सा | ध | नम् |
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