अन्वयः
AI
तेषाम् मध्यगता, पत्युः पादार्पितेक्षणा साध्वी अरुन्धती साक्षात् तपःसिद्धिः इव बहु बभासे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तेषामिति । तेषामृषीणां मध्यगता साध्वी पतिव्रता । अत एव पत्युर्वसिष्ठस्य पादयोरर्पितेक्षणा निविष्टदृष्टिररुन्धती साक्षात्प्रत्यक्षा तपःसिद्धिरिव तेषामेवति शेषः । तेषां मध्यगतेति लिङ्गवचनादिसाम्यादियमुपमा । बहु भूयिष्ठं बभासे भाति स्म
Summary
AI
Situated in their midst, the virtuous Arundhati, her gaze fixed on her husband's feet, shone brightly, as if she were the very embodiment of the success of asceticism.
सारांश
AI
उन ऋषियों के बीच अपने पति के चरणों में दृष्टि टिकाए हुए साध्वी अरुंधती ऐसी लग रही थीं मानो वे साक्षात् तपस्या की सिद्धि ही हों।
पदच्छेदः
AI
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| मध्यगता | मध्य–गत (१.१) | situated in the midst |
| साध्वी | साध्वी (१.१) | the virtuous |
| पत्युः | पति (६.१) | of her husband |
| पादार्पितेक्षणा | पाद–अर्पित–ईक्षण (१.१) | she whose gaze was fixed on the feet |
| साक्षात् | साक्षात् | as if |
| इव | इव | |
| तपःसिद्धिः | तपस्–सिद्धि (१.१) | the very embodiment of the success of asceticism |
| बभासे | बभासे (√भास् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | shone |
| बहु | बहु | brightly |
| अरुन्धती | अरुन्धती (१.१) | Arundhati |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | षां | म | ध्य | ग | ता | सा | ध्वी |
| प | त्युः | पा | दा | र्पि | ते | क्ष | णा |
| सा | क्षा | दि | व | त | पः | सि | द्धि |
| र्ब | भा | से | ब | ह्व | रु | न्ध | ती |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.