विमुच्य सा हारमहार्यनिश्चया
विलोलयष्टिप्रविलुप्तचन्दनम् ।
बबन्ध बालारुणबभ्रु वल्कलं
पयोधरोत्सेधविशीर्णसंहति ॥
विमुच्य सा हारमहार्यनिश्चया
विलोलयष्टिप्रविलुप्तचन्दनम् ।
बबन्ध बालारुणबभ्रु वल्कलं
पयोधरोत्सेधविशीर्णसंहति ॥
विलोलयष्टिप्रविलुप्तचन्दनम् ।
बबन्ध बालारुणबभ्रु वल्कलं
पयोधरोत्सेधविशीर्णसंहति ॥
अन्वयः
AI
अहार्यनिश्चया सा विलोलयष्टि-प्रविलुप्त-चन्दनम् हारम् विमुच्य, पयोधर-उत्सेध-विशीर्ण-संहति बाल-अरुण-बभ्रु वल्कलम् बबन्ध ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
विमुच्येति ॥ अहार्यनिश्चया अनिवार्यनिश्चया सा गौरी विलालाभिश्चलाभिर्यष्टिभिः प्रतिसरैः प्रविलुप्तं प्रमुष्टं चन्दनं स्तनान्तगतं येन तं तथोक्तं हारं मुक्तावलीं विमुच्य विहाय बालारुणबभ्रु बालार्कपिङ्गलं पयोधरयोः स्तनयोरुत्सेघेनोच्छ्रायेण विशीर्णा विघटिता संहतिरवयवसंश्लेषो यस्य तत्तथोक्तं वल्कलं कण्ठलम्बिस्तनोत्तरीयभूतं बबन्ध । धारयामासेत्यर्थः
Summary
AI
She of unshakeable resolve, having cast off her pearl necklace whose sandal paste was rubbed off by its swinging central string, tied on a bark garment, tawny like the morning sun, which strained and tore at the fullness of her breasts.
सारांश
AI
दृढ़ निश्चय वाली पार्वती ने अपने हार और चंदन का त्याग कर उगते सूर्य के समान लाल रंग के वल्कल वस्त्रों को धारण कर लिया।
पदच्छेदः
AI
| विमुच्य | विमुच्य (वि√मुच्+ल्यप्) | Having cast off |
| सा | तद् (१.१) | she |
| हारम् | हार (२.१) | her necklace |
| अहार्यनिश्चया | अहार्य (√हृ+ण्यत्)–निश्चय (१.१) | she of unshakeable resolve |
| विलोलयष्टिप्रविलुप्तचन्दनम् | विलोल–यष्टि–प्रविलुप्त (प्र+वि√लुप्+क्त)–चन्दन (२.१) | whose sandal paste was rubbed off by its swinging central string |
| बबन्ध | बबन्ध (√बन्ध् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | tied on |
| बालारुणबभ्रु | बाल–अरुण–बभ्रु (२.१) | tawny like the morning sun |
| वल्कलम् | वल्कल (२.१) | a bark garment |
| पयोधरोत्सेधविशीर्णसंहति | पयोधर–उत्सेध–विशीर्ण (वि√शॄ+क्त)–संहति (२.१) | which was torn by the fullness of her breasts |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | मु | च्य | सा | हा | र | म | हा | र्य | नि | श्च | या |
| वि | लो | ल | य | ष्टि | प्र | वि | लु | प्त | च | न्द | नम् |
| ब | ब | न्ध | बा | ला | रु | ण | ब | भ्रु | व | ल्क | लं |
| प | यो | ध | रो | त्से | ध | वि | शी | र्ण | सं | ह | ति |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.