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तदाप्रभृत्युन्मदना पितुर्गृहे
ललाटिकाचन्दनधूसरालका ।
न जातु बाला लभते स्म निर्वृतिं
तुषारसंघातशिलातलेष्वपि ॥

अन्वयः AI तदा-प्रभृति उन्मदना ललाटिका-चन्दन-धूसर-अलका बाला पितुः गृहे तुषार-संघात-शिला-तलेषु अपि जातु निर्वृतिम् न लभते स्म ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तदेति । तदेति छेदः । तदा प्रभृति । तत आरभ्येत्यर्थः । सप्तम्यर्थस्यापि दाप्रत्ययस्य पञ्चम्यर्थे लक्षणा । प्रभृतियोगे पञ्चमीनियमात् । पितुर्गृह उन्मदनोत्कटमन्मथा ललाटस्थालंकारो ललाटिका तिलकः । `कर्णललाटत्कनलंकारे` इति कन्प्रत्ययः । तस्याश्चन्दनेन धूसरा धूसरंवर्णा अलकाश्चूर्णकुन्तला यस्याः सा तथोक्ता बाला पार्वती जातु कदाचिदपि तुषारसंघातास्तुषारघनास्त एव शिलास्तासां तलेषूपरिभागेष्वपि निर्वृतिं सुखं न लभते स्म । एतेनारत्यपरसंज्ञा विषयविद्वेषावस्था द्वादशावस्थापक्षे संज्वरश्च व्यज्यते
Summary AI From that time onwards, tormented by love, the young girl, her hair locks grayed by the sandal paste on her forehead-ornament, never found peace in her father's house, not even on slabs of frozen snow.
सारांश AI उस समय से पिता के घर में कामपीड़ित पार्वती को हिमालय की बर्फीली शिलाओं पर भी शांति नहीं मिली। उनके बाल माथे के चंदन से मटमैले हो गए थे।
पदच्छेदः AI
तदाप्रभृतितदाप्रभृति From that time onwards
उन्मदनाउद्मदन (१.१) tormented by love
पितुःपितृ (६.१) of her father
गृहेगृह (७.१) in the house
ललाटिकाचन्दनधूसरालकाललाटिकाचन्दनधूसरअलका (१.१) she whose hair-locks were grayed by the sandal paste from her forehead ornament
not
जातुजातु ever
बालाबाला (१.१) the young girl
लभते स्मलभते स्म (√लभ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) found
निर्वृतिम्निर्वृति (२.१) peace
तुषारसंघातशिलातलेषुतुषारसंघातशिलातल (७.३) on slabs of frozen snow
अपिअपि even
छन्दः वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
दा प्र भृ त्यु न्म ना पि तु र्गृ हे
ला टि का न्द धू रा का
जा तु बा ला ते स्म नि र्वृ तिं
तु षा सं घा शि ला ले ष्व पि
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