विधिप्रयुक्तां परिगृह्य सत्क्रियां
परिश्रमं नाम विनीय च क्षणम् ।
उमां स पश्यन्न् ऋजुनैव चक्षुषा
प्रचक्रमे वक्तुमनुज्झितक्रमः ॥

अन्वयः AI सः अनुज्झित-क्रमः विधि-प्रयुक्ताम् सत्क्रियाम् परिगृह्य, क्षणम् परिश्रमम् विनीय च, ऋजुना एव चक्षुषा उमाम् पश्यन् वक्तुम् प्रचक्रमे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) विधीति । स ब्रह्मचारी विधिना प्रयुक्तामनुष्ठितां सत्क्रियां पूजां परिगृह्य स्वीकृत्य क्षणं परिश्रमं च विश्रामं च विनीय नामेत्यपरमार्थे । अथोमामृजुनैव विलासरहितेनैव चक्षुषा पश्यन्ननुज्झितक्रमोऽत्यक्तोचितपरिपाटीकः सन् । वक्तुं प्रचक्रमे प्रारेभे
Summary AI That ascetic, who followed proper etiquette, accepted the hospitality offered according to rites. After resting for a moment to remove his fatigue, he looked at Uma with a direct gaze and began to speak.
सारांश AI सत्कार ग्रहण कर और विश्राम के बाद, उस जटाधारी ने पार्वती को सहज भाव से देखते हुए नियमपूर्वक बातचीत प्रारंभ की।
पदच्छेदः AI
विधिप्रयुक्ताम्विधिप्रयुक्त (प्र√युज्+क्त, २.१) offered according to scriptural rites
परिगृह्यपरिगृह्य (परि√ग्रह्+ल्यप्) having accepted
सत्क्रियाम्सत्क्रिया (२.१) the good reception
परिश्रमम्परिश्रम (२.१) fatigue
नामनाम for form's sake
विनीयविनीय (वि√नी+ल्यप्) having removed
and
क्षणम्क्षण (२.१) for a moment
उमाम्उमा (२.१) Uma (Parvati)
सःतद् (१.१) he
पश्यन्पश्यत् (√दृश्+शतृ, १.१) looking
ऋजुनाऋजु (३.१) with a straight
एवएव only
चक्षुषाचक्षुस् (३.१) gaze
प्रचक्रमेप्रचक्रमे (प्र√क्रम् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) began
वक्तुम्वक्तुम् (√वच्+तुमुन्) to speak
अनुज्झितक्रमःनञ्उज्झित (उद्√उझ्झ्+क्त)क्रम (१.१) one who did not abandon proper etiquette
छन्दः वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
वि धि प्र यु क्तां रि गृ ह्य त्क्रि यां
रि श्र मं ना वि नी क्ष णम्
मां श्य न्नृ जु नै क्षु षा
प्र क्र मे क्तु नु ज्झि क्र मः
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