प्रतिक्षणं सा कृतरोमविक्रियां
व्रताय मौञ्जीं त्रिगुणां बभार याम् ।
अकारि तत्पूर्वनिबद्धया तया
सरागमस्या रसनागुणास्पदम् ॥
प्रतिक्षणं सा कृतरोमविक्रियां
व्रताय मौञ्जीं त्रिगुणां बभार याम् ।
अकारि तत्पूर्वनिबद्धया तया
सरागमस्या रसनागुणास्पदम् ॥
व्रताय मौञ्जीं त्रिगुणां बभार याम् ।
अकारि तत्पूर्वनिबद्धया तया
सरागमस्या रसनागुणास्पदम् ॥
अन्वयः
AI
सा व्रताय याम् त्रिगुणाम् मौञ्जीम् बभार, तया प्रतिक्षणम् कृतरोमविक्रिया (अभूत्) । तत्पूर्वनिबद्धया तया अस्याः रसनागुणास्पदम् सरागम् अकारि ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
प्रतीति । सा देवी प्रतिक्षणं क्षणे क्षणे कृतरोमविक्रियां पारुष्यात्कृतरोमाञ्चां त्रिगुणां त्रिरावृतां यां मौञ्जीं मुञ्जमयीं मेखलां व्रताय तपसे बभार । तदेव पूर्वं प्रथमं यस्य तत्पूर्वं यथा तथा निबद्धया तया मौञ्ज्यास्या देव्या रसनागुणस्यास्पदं स्थानं जघनम् । सह रागेण सरागं सलोहितमकारि कृतम् । सौकुमार्यातिशयादिति भावः
Summary
AI
The threefold girdle of Munja grass she wore for her vow, which caused her body hair to stand on end every moment, left red marks on the place of her jeweled girdle, which had been tied there before.
सारांश
AI
पार्वती ने तप के लिए मूंज की मेखला धारण की, जिसने उनके कटि प्रदेश पर लाल रंग के निशान बना दिए, जहाँ पहले रत्नजड़ित करधनी शोभा पाती थी।
पदच्छेदः
AI
| प्रतिक्षणम् | प्रतिक्षणम् | Every moment |
| सा | तद् (१.१) | she |
| कृतरोमविक्रियाम् | कृत (√कृ+क्त)–रोमविक्रिया (२.१) | her whose body hair was made to stand on end |
| व्रताय | व्रत (४.१) | for her vow |
| मौञ्जीम् | मौञ्जी (२.१) | the girdle of Munja grass |
| त्रिगुणाम् | त्रिगुणा (२.१) | threefold |
| बभार | बभार (√भृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | wore |
| याम् | यद् (२.१) | which |
| अकारि | अकारि (√कृ भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was made |
| तत्पूर्वनिबद्धया | तद्–पूर्व–निबद्ध (नि√बन्ध्+क्त, ३.१) | by that which was tied there before |
| तया | तद् (३.१) | by it (the girdle) |
| सरागम् | सराग (२.१) | red |
| अस्याः | इदम् (६.१) | her |
| रसनागुणास्पदम् | रसना–गुण–आस्पद (१.१) | the place of her jeweled girdle |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | ति | क्ष | णं | सा | कृ | त | रो | म | वि | क्रि | यां |
| व्र | ता | य | मौ | ञ्जीं | त्रि | गु | णां | ब | भा | र | याम् |
| अ | का | रि | त | त्पू | र्व | नि | ब | द्ध | या | त | या |
| स | रा | ग | म | स्या | र | स | ना | गु | णा | स्प | दम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.