तपःपरामर्शविवृद्धमन्यो-
र्भ्रूभङ्गदुष्प्रेक्ष्यमुखस्य तस्य ।
स्फुरन्नुदर्चिः सहसा तृतीया-
दक्ष्णः कृशानुः किल निष्पपात ॥
तपःपरामर्शविवृद्धमन्यो-
र्भ्रूभङ्गदुष्प्रेक्ष्यमुखस्य तस्य ।
स्फुरन्नुदर्चिः सहसा तृतीया-
दक्ष्णः कृशानुः किल निष्पपात ॥
र्भ्रूभङ्गदुष्प्रेक्ष्यमुखस्य तस्य ।
स्फुरन्नुदर्चिः सहसा तृतीया-
दक्ष्णः कृशानुः किल निष्पपात ॥
अन्वयः
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तपः-परामर्श-विवृद्ध-मन्योः भ्रू-भङ्ग-दुष्प्रेक्ष्य-मुखस्य तस्य तृतीयात् अक्ष्णः स्फुरन्-उत्-अर्चिः कृशानुः सहसा निष्पपात किल ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तप इति । तपःपरामर्शेन तपस आस्कन्दनेन विवृद्धमन्योः प्रवृद्धकोपस्य भ्रूभङ्गेण दुष्प्रेक्ष्यं दुर्दशं मुखं यस्य तस्य हरस्य तृती.यादक्ष्णः स्फुरन्नुद्दीप्यमान उदर्चिरुद्भूतज्वालः कृशानुरग्निः सहसातर्कितमेव । `अतर्किते तु सहसा` इत्यमरः (अमरकोशः ३.४.७ ) । निष्पपात किल निश्चक्राम खलु
Summary
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From the third eye of him (Shiva)—whose wrath was inflamed by the violation of his penance and whose face was difficult to look at due to his knitted brows—fire with flashing, upward flames suddenly burst forth.
सारांश
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तपस्या में विघ्न पड़ने से शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे और उनके कांपते हुए तीसरे नेत्र से अचानक भयंकर आग की लपटें बाहर निकलने लगीं।
पदच्छेदः
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| तपःपरामर्शविवृद्धमन्योः | तपस्–परामर्श–विवृद्ध (वि√वृध्+क्त)–मन्यु (६.१) | of him whose wrath was inflamed by the violation of his penance |
| भ्रूभङ्गदुष्प्रेक्ष्यमुखस्य | भ्रू–भङ्ग–दुष्प्रेक्ष्य–मुख (६.१) | whose face was difficult to look at due to his knitted brows |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| स्फुरन्नुदर्चिः | स्फुरत्–उत्–अर्चिस् (१.१) | with flashing, upward flames |
| सहसा | सहसा | suddenly |
| तृतीयात् | तृतीय (५.१) | from the third |
| अक्ष्णः | अक्षि (५.१) | eye |
| कृशानुः | कृशानु (१.१) | fire |
| किल | किल | indeed |
| निष्पपात | निष्पपात (निस्√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | burst forth |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | पः | प | रा | म | र्श | वि | वृ | द्ध | म | न्यो |
| र्भ्रू | भ | ङ्ग | दु | ष्प्रे | क्ष्य | मु | ख | स्य | त | स्य |
| स्फु | र | न्नु | द | र्चिः | स | ह | सा | तृ | ती | या |
| द | क्ष्णः | कृ | शा | नुः | कि | ल | नि | ष्प | पा | त |
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