हरस्तु किंचित्परिलुप्तधैर्य-
श्चन्द्रोदयारम्भ इवाम्बुराशिः ।
उमामुखे बिम्बफलाधरोष्ठे
व्यापारयामास विलोचनानि ॥

अन्वयः AI तु चन्द्र-उदय-आरम्भे अम्बु-राशिः इव, किंचित् परि-लुप्त-धैर्यः हरः बिम्ब-फल-अधर-ओष्ठे उमा-मुखे विलोचनानि व्यापारयामास ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) हर इति । हरस्तु हरोऽपि चन्द्रोदयारम्भेऽम्बुराशिरिव किंचिदीषत्परिलुप्तधैर्यः न तु प्राकृतजनवदत्यन्तलुप्तधैर्य इति भावः । बिम्बफलतुल्योऽधरोष्ठो यस्य तस्मिन्निमामुखे विलोचनानि व्यापारयामास । त्रिभिरपि लोचनैः साभिलाषमद्राक्षीदित्यर्थः । एतेन भगवतो रतिभावोदय उक्तः
Summary AI But Hara, his composure somewhat lost, like the ocean at the beginning of moonrise, directed his eyes towards Uma's face, which had a lower lip like a Bimba fruit.
सारांश AI चन्द्रोदय के समय समुद्र की भाँति महादेव का धैर्य कुछ विचलित हुआ और उन्होंने बिम्ब फल जैसे लाल होठों वाले पार्वती के सुंदर मुख की ओर देखा।
पदच्छेदः AI
हरःहर (१.१) Hara (Shiva)
तुतु But
किंचित्किंचित् somewhat
परिलुप्तधैर्यःपरिलुप्त (परि√लुप्+क्त)धैर्य (१.१) whose composure was lost
चन्द्रोदयारम्भेचन्द्रउदयआरम्भ (७.१) at the beginning of moonrise
इवइव like
अम्बुराशिःअम्बुराशि (१.१) the ocean
उमामुखेउमामुख (७.१) on Uma's face
बिम्बफलाधरोष्ठेबिम्बफलअधरओष्ठ which had a lower lip like a Bimba fruit
व्यापारयामासव्यापारयामास (वि+आ√पृ +णिच्+आम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) directed
विलोचनानिविलोचन (२.३) his eyes
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
स्तु किं चि त्प रि लु प्त धै र्य
श्च न्द्रो या म्भ वा म्बु रा शिः
मा मु खे बि म्ब ला रो ष्ठे
व्या पा या मा वि लो ना नि
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