प्रतिग्रहीतुं प्रणयिप्रियत्वा-
त्त्रिलोचनस्तामुपचक्रमे च ।
संमोहनं नाम च पुष्पधन्वा
धनुष्यमोघं समधत्त बाणम् ॥
प्रतिग्रहीतुं प्रणयिप्रियत्वा-
त्त्रिलोचनस्तामुपचक्रमे च ।
संमोहनं नाम च पुष्पधन्वा
धनुष्यमोघं समधत्त बाणम् ॥
त्त्रिलोचनस्तामुपचक्रमे च ।
संमोहनं नाम च पुष्पधन्वा
धनुष्यमोघं समधत्त बाणम् ॥
अन्वयः
AI
प्रणयि-प्रियत्वात् त्रि-लोचनः च ताम् प्रतिग्रहीतुम् उपचक्रमे । पुष्प-धन्वा च धनुषि अमोघम् संमोहनम् नाम बाणम् समधत्त ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
प्रतिग्रहीतुमिति । त्रिलोचनश्च प्रणयिप्रियत्वादर्थिप्रियत्वात्तामक्षमालां प्रतिग्रहीतुं स्वीकर्तुमुपचक्रमे । पुष्पं धनुर्यस्य स पुष्पधन्वा कामश्च । `वा संज्ञायाम्` (अष्टाध्यायी ५.४.१३३ ) इत्यनङादेशः संमोह्यतेनेनेति संमोहनं नाम । नामेति प्रसिद्धौ अमोघं बाणं सायकं धनुषि समधत्त संहितवान्
Summary
AI
And the three-eyed Lord, out of his fondness for supplicants, began to accept it (the rosary). And the flower-bowed one (Kama) fixed on his bow his unfailing arrow named Sammohana (the Deluder).
सारांश
AI
प्रेमियों के प्रति स्नेह के कारण शिव ने जब उसे ग्रहण करना चाहा, उसी समय कामदेव ने अपने धनुष पर 'सम्मोहन' नामक अमोघ बाण चढ़ा लिया।
पदच्छेदः
AI
| प्रतिग्रहीतुम् | प्रतिग्रहीतुम् (प्रति√ग्रह्+तुमुन्) | to accept |
| प्रणयिप्रियत्वात् | प्रणयिन्–प्रियत्व (५.१) | out of fondness for supplicants |
| त्रिलोचनः | त्रिलोचन (१.१) | the three-eyed one (Shiva) |
| ताम् | तद् (२.१) | it |
| उपचक्रमे | उपचक्रमे (उप√क्रम् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | began |
| च | च | and |
| संमोहनम् | संमोहन (२.१) | Sammohana (the Deluder) |
| नाम | नाम | by name |
| च | च | and |
| पुष्पधन्वा | पुष्पधन्वन् (१.१) | the flower-bowed one (Kama) |
| धनुषि | धनुस् (७.१) | on the bow |
| अमोघम् | अमोघ (२.१) | unfailing |
| समधत्त | समधत्त (सम्√धा कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | fixed |
| बाणम् | बाण (२.१) | arrow |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | ति | ग्र | ही | तुं | प्र | ण | यि | प्रि | य | त्वा |
| त्त्रि | लो | च | न | स्ता | मु | प | च | क्र | मे | च |
| सं | मो | ह | नं | ना | म | च | पु | ष्प | ध | न्वा |
| ध | नु | ष्य | मो | घं | स | म | ध | त्त | बा | णम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.