तस्याः सखीभ्यां प्रणिपातपूर्वं
स्वहस्तलूनः शिशिरात्ययस्य ।
व्यकीर्यत त्र्यम्बकपादमूले
पुष्पोच्चयः पल्लवभङ्गभिन्नः ॥
तस्याः सखीभ्यां प्रणिपातपूर्वं
स्वहस्तलूनः शिशिरात्ययस्य ।
व्यकीर्यत त्र्यम्बकपादमूले
पुष्पोच्चयः पल्लवभङ्गभिन्नः ॥
स्वहस्तलूनः शिशिरात्ययस्य ।
व्यकीर्यत त्र्यम्बकपादमूले
पुष्पोच्चयः पल्लवभङ्गभिन्नः ॥
अन्वयः
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तस्याः सखीभ्याम् प्रणिपात-पूर्वम् स्व-हस्त-लूनः शिशिर-अत्ययस्य पल्लव-भङ्ग-भिन्नः पुष्प-उच्चयः त्रि-अम्बक-पाद-मूले व्यकीर्यत ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्या इति । तस्याः पार्वत्याः सखीभ्यां पूर्वोक्ताभ्यां स्वहस्तेन लून उपचितः पल्लवभङ्गभिन्नः किसलयशकलमिश्रः शिशिरात्ययस्य वसन्तस्य सम्बन्धी पुष्पोच्चयः पुष्पप्रकारः । `हस्तादाने चेरस्तेये` (अष्टाध्यायी ३.३.४० ) इति घञ्विषयत्वात्कवीनामयं प्रामादिकः प्रयोग इति वल्लभः । त्र्यम्बकपादमूले प्रणिपातपूर्वं नमस्कारपूर्वंकं व्यकीर्यत विक्षिप्तः
Summary
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A heap of spring flowers, plucked by their own hands and mixed with bits of new leaves, was scattered at the feet of the three-eyed god by her two friends, after they had first bowed.
सारांश
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पार्वती की सखियों ने प्रणाम करके स्वयं चुने हुए वसंत ऋतु के फूलों और पल्लवों के ढेर को त्र्यम्बक (शिव) के चरणों में अर्पित किया।
पदच्छेदः
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| तस्याः | तद् (६.१) | Her |
| सखीभ्याम् | सखि (३.२) | by the two friends |
| प्रणिपातपूर्वम् | प्रणिपातपूर्वम् | preceded by a bow |
| स्वहस्तलूनः | स्व–हस्त–लून (√लू+क्त, १.१) | plucked by their own hands |
| शिशिरात्ययस्य | शिशिर–अत्यय (६.१) | of spring (end of winter) |
| व्यकीर्यत | व्यकीर्यत (वि√कॄ भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was scattered |
| त्र्यम्बकपादमूले | त्र्यम्बक–पाद–मूल (७.१) | at the base of the feet of the three-eyed one |
| पुष्पोच्चयः | पुष्प–उच्चय (१.१) | a heap of flowers |
| पल्लवभङ्गभिन्नः | पल्लव–भङ्ग–भिन्न (१.१) | mixed with bits of new leaves |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्याः | स | खी | भ्यां | प्र | णि | पा | त | पू | र्वं |
| स्व | ह | स्त | लू | नः | शि | शि | रा | त्य | य | स्य |
| व्य | की | र्य | त | त्र्य | म्ब | क | पा | द | मू | ले |
| पु | ष्पो | च्च | यः | प | ल्ल | व | भ | ङ्ग | भि | न्नः |
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