अध्यापितस्योशनसापि नीतिं
प्रयुक्तरागप्रणिधिर्द्विषस्ते ।
कस्यार्थधर्मौ वद पीडयामि
सिन्धोस्तटावोघ इव प्रवृद्धः ॥
अध्यापितस्योशनसापि नीतिं
प्रयुक्तरागप्रणिधिर्द्विषस्ते ।
कस्यार्थधर्मौ वद पीडयामि
सिन्धोस्तटावोघ इव प्रवृद्धः ॥
प्रयुक्तरागप्रणिधिर्द्विषस्ते ।
कस्यार्थधर्मौ वद पीडयामि
सिन्धोस्तटावोघ इव प्रवृद्धः ॥
अन्वयः
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उशनसा अपि नीतिम् अध्यापितस्य ते द्विषः विषये प्रयुक्तरागप्रणिधिः अहम्, प्रवृद्धः ओघः सिन्धोः तटौ इव, कस्य अर्थधर्मौ पीडयामि? वद।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अध्यापितस्येति ॥ उशनसा शुक्रेण नीतिं नीतिशास्त्रमध्यापितस्यापि अपि शब्दाच्छुक्रशिष्याणामप्रधृष्यत्वं गम्यते । `गतिबुद्धि-` इत्यादिना द्विकर्मकादिण्धातोर्ण्यन्तात्प्रधाने कर्मणि क्तः `अप्रधाने दुहादीनां ण्यन्ते कर्तुश्च कर्मणः` ।इति वचनात् । ते द्विषस्तव शत्रोः कस्यार्थधर्मौ प्रयुक्तः प्रहितो रागो विषयाभिलाष एव प्रणिधिर्बूतो येन सोऽहम् । `प्रार्थने प्रणिधिः चरे` इति यादवः । प्रवृद्ध ओघः सिन्धोर्नद्यास्तटाविव पीडयामि वद
Summary
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"Tell me, whose wealth and righteousness shall I destroy, like a swollen river eroding its two banks? I am your agent of passion against your enemy, even if he has been taught statecraft by Shukracharya himself."
सारांश
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नीति में निपुण आपके किस शत्रु के अर्थ और धर्म को मैं अपनी लहरों से नदी के तट की तरह नष्ट कर दूँ? मेरे प्रभाव से वे विचलित हो जाएंगे।
पदच्छेदः
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| अध्यापितस्य | अध्यापित (अधि√इ+णिच्+क्त, ६.१) | of one who has been taught |
| उशनसा | उशनस् (३.१) | by Shukracharya |
| अपि | अपि | even |
| नीतिम् | नीति (२.१) | polity |
| प्रयुक्तरागप्रणिधिः | प्रयुक्त–राग–प्रणिधि (१.१) | I, who am your spy of passion |
| द्विषः | द्विष् (६.१) | of the enemy |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| कस्य | किम् (६.१) | whose |
| अर्थधर्मौ | अर्थ–धर्म (२.२) | wealth and righteousness |
| वद | वद (√वद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | tell me |
| पीडयामि | पीडयामि (√पीड् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | shall I afflict |
| सिन्धोः | सिन्धु (६.१) | of a river |
| तटौ | तट (२.२) | the two banks |
| ओघः | ओघ (१.१) | a flood |
| इव | इव | like |
| प्रवृद्धः | प्रवृद्ध (प्र√वृध्+क्त, १.१) | swollen |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ध्या | पि | त | स्यो | श | न | सा | पि | नी | तिं |
| प्र | यु | क्त | रा | ग | प्र | णि | धि | र्द्वि | ष | स्ते |
| क | स्या | र्थ | ध | र्मौ | व | द | पी | ड | या | मि |
| सि | न्धो | स्त | टा | वो | घ | इ | व | प्र | वृ | द्धः |
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