भविष्यतः पत्युरुमा च शंभोः
समाससाद प्रतिहारभूमिम् ।
योगात्स चान्तः परमात्मसंज्ञं
दृष्ट्वा परं ज्योतिरुपारराम ॥
भविष्यतः पत्युरुमा च शंभोः
समाससाद प्रतिहारभूमिम् ।
योगात्स चान्तः परमात्मसंज्ञं
दृष्ट्वा परं ज्योतिरुपारराम ॥
समाससाद प्रतिहारभूमिम् ।
योगात्स चान्तः परमात्मसंज्ञं
दृष्ट्वा परं ज्योतिरुपारराम ॥
अन्वयः
AI
उमा च भविष्यतः पत्युः शम्भोः प्रतिहार-भूमिम् समाससाद । सः च योगात् अन्तः परम-आत्म-संज्ञम् परम् ज्योतिः दृष्ट्वा उपारराम ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
भविष्यत इति । उमा च भविष्यतः पत्युः शंभोः प्रतिहारभूमिं द्वारदेशं समाससाद । `स्त्री द्वार्द्वारं प्रतीहारः` इत्यमरः (अमरकोशः २.२.१६ ) । स शंभुश्चान्तः परमात्मेति संज्ञा यस्य तत्परं मुख्यम् `रं दूरान्मुख्येषु ` इति यादवः । ज्योतिर्दृष्ट्वा साक्षात्कृत्य योगध्यानात्। `योगः संनहनोपायध्यानसंगतियुक्तिषु` इत्यमरः (अमरकोशः २.२.१६ ) । उपाररामोपारतः । `व्याङ्परिभ्यो रमः` (अष्टाध्यायी १.३.८३ ) इति परस्मैपदम्
Summary
AI
And Uma reached the doorkeeper's station of her future husband, Shambhu. And he (Shiva), having seen within himself through yoga the supreme light known as the Paramatman, ceased from his meditation.
सारांश
AI
जैसे ही पार्वती अपने भावी पति शिव के समीप पहुँचीं, शिव ने भी परमात्मा के ज्योतिर्मय स्वरूप का साक्षात्कार पूरा कर अपना ध्यान समाप्त किया।
पदच्छेदः
AI
| भविष्यतः | भविष्यत् (√भू+स्य+शत्रृ, ६.१) | of the future |
| पत्युः | पति (६.१) | husband |
| उमा | उमा (१.१) | Uma |
| च | च | and |
| शंभोः | शम्भु (६.१) | of Shambhu |
| समाससाद | समाससाद (सम्+आ√सद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reached |
| प्रतिहारभूमिम् | प्रतिहार–भूमि (२.१) | the doorkeeper's station |
| योगात् | योग (५.१) | from yoga |
| सः | तद् (१.१) | He |
| च | च | and |
| अन्तः | अन्तः | within |
| परमात्मसंज्ञम् | परम–आत्मन्–संज्ञा (२.१) | named the Supreme Self |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having seen |
| परम् | पर (२.१) | the supreme |
| ज्योतिः | ज्योतिस् (२.१) | light |
| उपारराम | उपारराम (उप+आ√रम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | ceased |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | वि | ष्य | तः | प | त्यु | रु | मा | च | शं | भोः |
| स | मा | स | सा | द | प्र | ति | हा | र | भू | मिम् |
| यो | गा | त्स | चा | न्तः | प | र | मा | त्म | सं | ज्ञं |
| दृ | ष्ट्वा | प | रं | ज्यो | ति | रु | पा | र | रा | म |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.