तां वीक्ष्य सर्वावयवानवद्यां
रतेरपि ह्रीपदमादधानाम् ।
जितेन्द्रिये शूलिनि पुष्पचापः
स्वकार्यसिद्धिं पुनराशशंसे ॥
तां वीक्ष्य सर्वावयवानवद्यां
रतेरपि ह्रीपदमादधानाम् ।
जितेन्द्रिये शूलिनि पुष्पचापः
स्वकार्यसिद्धिं पुनराशशंसे ॥
रतेरपि ह्रीपदमादधानाम् ।
जितेन्द्रिये शूलिनि पुष्पचापः
स्वकार्यसिद्धिं पुनराशशंसे ॥
अन्वयः
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सर्व-अवयव-अनवद्याम् रतेः अपि ह्री-पदम् आदधानाम् ताम् वीक्ष्य, पुष्प-चापः जित-इन्द्रिये शूलिनि पुनः स्व-कार्य-सिद्धिम् आशशंसे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तामिति । सर्वावयवेष्वनवद्यामगर्ह्याम् । `अवद्यपण्ये-` ति निपातः । रतेः कामकलत्रस्यापि ह्रीपदं लज्जानिमित्तमादधानाम् । न्यूनतामावहन्तीमित्यर्थः । तां पार्वतीं वीक्ष्य पुष्पचापः कामो जितेन्द्रिये दुर्जयेऽपीत्यर्थः । शूलिनि शिवे विषये स्वकार्यसिद्धिं पुनराशशंसे चकमे । पूर्वं `साध्वससन्नहस्तः` (३, ५१) इत्यादिना कार्यसिद्धेरुन्मूलितत्वाभिधानादिह पुनरित्युक्तम्
Summary
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Seeing her, flawless in every limb and causing even Rati (goddess of beauty) to feel shame, Kamadeva once again hoped for the success of his mission with the self-controlled, trident-bearing Shiva.
सारांश
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रति को भी लज्जित करने वाले पार्वती के उस अनुपम सौंदर्य को देखकर कामदेव को जितेंद्रिय शिव पर विजय पाने की अपनी सफलता का पुनः विश्वास हो गया।
पदच्छेदः
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| ताम् | तद् (२.१) | her |
| वीक्ष्य | वीक्ष्य (वि√ईक्ष्+ल्यप्) | having seen |
| सर्वावयवानवद्याम् | सर्व–अवयव–अनवद्य (२.१) | flawless in every limb |
| रतेः | रति (६.१) | of Rati |
| अपि | अपि | even |
| ह्रीपदम् | ह्री–पद (२.१) | the cause of shame |
| आदधानाम् | आदधान (आ√धा+शानच्, २.१) | causing |
| जितेन्द्रिये | जितेन्द्रिय (७.१) | on the self-controlled one |
| शूलिनि | शूलिन् (७.१) | on the trident-bearer (Shiva) |
| पुष्पचापः | पुष्पचाप (१.१) | the flower-bowed one (Kama) |
| स्वकार्यसिद्धिम् | स्व–कार्य–सिद्धि (२.१) | the success of his own task |
| पुनः | पुनः | again |
| आशशंसे | आशशंसे (आ√शंस कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | hoped for |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | वी | क्ष्य | स | र्वा | व | य | वा | न | व | द्यां |
| र | ते | र | पि | ह्री | प | द | मा | द | धा | नाम् |
| जि | ते | न्द्रि | ये | शू | लि | नि | पु | ष्प | चा | पः |
| स्व | का | र्य | सि | द्धिं | पु | न | रा | श | शं | से |
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