सुगन्धिनिःश्वासविवृद्धतृष्णं
बिम्बाधरासन्नचरं द्विरेफम् ।
प्रतिक्षणं संभ्रमलोलदृष्टि-
र्लीलारविन्देन निवारयन्ती ॥

अन्वयः AI सुगन्धि-निःश्वास-विवृद्ध-तृष्णम् बिम्ब-अधर-आसन्न-चरम् द्विरेफम् लीला-अरविन्देन प्रति-क्षणम् निवारयन्ती, (सा) संभ्रम-लोल-दृष्टिः (आसीत्) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) सुगन्धीति । सुगन्धिभिर्निश्वासैर्विवृद्धतृष्णम् । बिम्बतुल्योऽधरो बिम्बाधरः । `वृत्तौ मध्यपदलोपः स्यात्` इति वामनः । तस्यासन्नचरं संनिकृष्टचरं द्विरेफं भृङ्गं प्रतिक्षणं संभ्रमेण लोलदृष्टिश्चञ्चलाक्षी सती लीलारविन्देन निवारयन्ती
Summary AI With flurried, unsteady eyes, she was every moment warding off with her play-lotus a bee that, its desire intensified by her fragrant breath, was hovering near her Bimba-like lower lip.
सारांश AI अपनी सुगंधित श्वासों के कारण बिम्बाफल जैसे होंठों पर मंडराते भौंरे को पार्वती अपनी चंचल दृष्टि और हाथ में लिए क्रीड़ा-कमल से बार-बार हटा रही थीं।
पदच्छेदः AI
सुगन्धिनिःश्वासविवृद्धतृष्णम्सुगन्धिनिःश्वासविवृद्ध (वि√वृध्+क्त)तृष्णा whose desire was increased by her fragrant breath
बिम्बाधरासन्नचरम्बिम्बअधरआसन्नचर (२.१) hovering near her Bimba-like lower lip
द्विरेफम्द्विरेफ (२.१) a bee
प्रतिक्षणम्प्रतिक्षणम् every moment
संभ्रमलोलदृष्टिःसंभ्रमलोलदृष्टि (१.१) with flurried, unsteady eyes
लीलारविन्देनलीलाअरविन्द (३.१) with her play-lotus
निवारयन्तीनिवारयन्ती (नि√वृ+णिच्+शत्रृ, १.१) warding off
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
सु न्धि निः श्वा वि वृ द्ध तृ ष्णं
बि म्बा रा न्न रं द्वि रे फम्
प्र ति क्ष णं सं भ्र लो दृ ष्टि
र्ली ला वि न्दे नि वा न्ती
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