आवर्जिता किं चिदिव स्तनाभ्यां
वासो वसाना तरुणार्करागम् ।
पर्याप्तपुष्पस्तबकावनम्रा
संचारिणी पल्लविनी लतेव ॥
आवर्जिता किं चिदिव स्तनाभ्यां
वासो वसाना तरुणार्करागम् ।
पर्याप्तपुष्पस्तबकावनम्रा
संचारिणी पल्लविनी लतेव ॥
वासो वसाना तरुणार्करागम् ।
पर्याप्तपुष्पस्तबकावनम्रा
संचारिणी पल्लविनी लतेव ॥
अन्वयः
AI
स्तनाभ्याम् किम् चित् इव आवर्जिता, तरुण-अर्क-रागम् वासः वसाना, पर्याप्त-पुष्प-स्तबक-अवनम्रा, सञ्चारिणी पल्लविनी लता इव (सा आसीत्) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
आवर्जितेति । स्तनाभ्यां किंचिदावर्जितेवेषदानमितेव तरुणार्कस्य राग इव रागो यस्य तत् । बालार्कारुणमित्यर्थः । उपमानपूर्वपदो बहुव्रीहिरुत्तरपदलोपश्च । वासो वसानाच्छादयन्ती । अत एव पर्याप्तपुष्पस्तबकावनम्रा पल्लविनी किसलयवती संचारिणी लतेव । स्थितेति शेषः
Summary
AI
Slightly bent by her breasts, wearing a garment the color of the rising sun, she was like a moving, leafy creeper bowed down by abundant clusters of flowers.
सारांश
AI
स्तनों के भार से थोड़ा झुकी हुई और उगते सूर्य के समान लाल वस्त्र धारण किए हुए पार्वती, फूलों के गुच्छों से लदी हुई किसी चलती-फिरती कल्पलता के समान लग रही थीं।
पदच्छेदः
AI
| आवर्जिता | आवर्जित (आ√वृज्+क्त, १.१) | slightly bent |
| किं चिदिव | किंचित्–इव | a little, as it were |
| स्तनाभ्याम् | स्तन (३.२) | by her breasts |
| वासः | वासस् (२.१) | a garment |
| वसाना | वसान (√वस्+शानच्, १.१) | wearing |
| तरुणार्करागम् | तरुण–अर्क–राग (२.१) | the color of the rising sun |
| पर्याप्तपुष्पस्तबकावनम्रा | पर्याप्त–पुष्प–स्तबक–अवनम्र (अव√नम्+क्त, १.१) | bowed down by abundant clusters of flowers |
| संचारिणी | संचारिन् (१.१) | moving |
| पल्लविनी | पल्लविन् (१.१) | full of new leaves |
| लता | लता (१.१) | a creeper |
| इव | इव | like |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | व | र्जि | ता | किं | चि | दि | व | स्त | ना | भ्यां |
| वा | सो | व | सा | ना | त | रु | णा | र्क | रा | गम् |
| प | र्या | प्त | पु | ष्प | स्त | ब | का | व | न | म्रा |
| सं | चा | रि | णी | प | ल्ल | वि | नी | ल | ते | व |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.