निर्वाणभूयिष्ठमथास्य वीर्यं
संधुक्षयन्तीव वपुर्गुणेन ।
अनुप्रयाता वनदेवताभ्या-
मदृश्यत स्थावरराजकन्या ॥
निर्वाणभूयिष्ठमथास्य वीर्यं
संधुक्षयन्तीव वपुर्गुणेन ।
अनुप्रयाता वनदेवताभ्या-
मदृश्यत स्थावरराजकन्या ॥
संधुक्षयन्तीव वपुर्गुणेन ।
अनुप्रयाता वनदेवताभ्या-
मदृश्यत स्थावरराजकन्या ॥
अन्वयः
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अथ अस्य निर्वाण-भूयिष्ठम् वीर्यम् वपुः-गुणेन संधुक्षयन्ती इव, वन-देवताभ्याम् अनुप्रयाता स्थावर-राज-कन्या अदृश्यत ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
निर्वाणेति । अथ निर्वाणेन नाशेन भूयिष्ठं निर्वाणभूयिष्ठम् । नष्टप्रायमित्यर्थः । अस्य स्मरस्य वीर्यं बलं वपुर्गुणेन सौन्दर्येण संधुक्षयन्तीव पुनरुज्जीवयन्तीव स्थिता वनदेवताभ्याम् सखीभूताभ्यामनुप्रयातानुगता स्थावरराजकन्या पार्वत्यदृश्यत दृष्टा
Summary
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Then, as if rekindling his (Kama's) nearly extinguished prowess with the excellence of her form, the daughter of the king of mountains (Parvati), followed by two forest goddesses, came into view.
सारांश
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उसी समय कामदेव के लुप्त होते साहस को अपने सौंदर्य से पुनः जाग्रत करती हुई पार्वती, वन-देवियों के साथ वहां उपस्थित हुईं।
पदच्छेदः
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| निर्वाणभूयिष्ठम् | निर्वाण–भूयिष्ठ (२.१) | mostly extinguished |
| अथ | अथ | Then |
| अस्य | इदम् (६.१) | his (Kama's) |
| वीर्यम् | वीर्य (२.१) | prowess |
| संधुक्षयन्ती | संधुक्षयन्ती (सम्√धुक्ष्+णिच्+शत्रृ, १.१) | rekindling |
| इव | इव | as if |
| वपुर्गुणेन | वपुस्–गुण (३.१) | by the excellence of her form |
| अनुप्रयाता | अनुप्रयात (अनु+प्र√या+क्त, १.१) | followed |
| वनदेवताभ्याम् | वन–देवता (३.२) | by two forest goddesses |
| अदृश्यत | अदृश्यत (√दृश् भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was seen |
| स्थावरराजकन्या | स्थावर–राज–कन्या (१.१) | the daughter of the king of mountains (Parvati) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | र्वा | ण | भू | यि | ष्ठ | म | था | स्य | वी | र्यं |
| सं | धु | क्ष | य | न्ती | व | व | पु | र्गु | णे | न |
| अ | नु | प्र | या | ता | व | न | दे | व | ता | भ्या |
| म | दृ | श्य | त | स्था | व | र | रा | ज | क | न्या |
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